छत्तीसगढ़ के सरकारी अधिकारी और कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन के मूड में हैं। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन (CKAF) के बैनर तले प्रदेश भर के शासकीय सेवक 18 मार्च को जिला और ब्लॉक मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे।
फेडरेशन के आह्वान पर होने वाला यह विरोध प्रदर्शन कार्यालयीन समय के दौरान लंच ब्रेक में आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रदेश के विभिन्न विभागों से बड़ी संख्या में कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
कर्मचारियों की नाराजगी का मुख्य कारण चुनाव के दौरान घोषित ‘मोदी की गारंटी’ से जुड़े वादों को अब तक पूरा न किया जाना बताया जा रहा है। फेडरेशन की प्रमुख मांगों में जुलाई 2016 से लंबित महंगाई भत्ते के एरियर को सामान्य भविष्य निधि (GPF) खाते में समायोजित करना और 8, 16, 24 तथा 32 वर्ष की सेवा अवधि पर चार स्तरीय समयमान वेतनमान लागू करना शामिल है।
इसके साथ ही कर्मचारी मध्य प्रदेश की तर्ज पर अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सीमा को बढ़ाकर 300 दिन करने की मांग भी उठा रहे हैं।
आंदोलन के अन्य मुद्दों में पिंगुआ समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करना भी शामिल है, ताकि लिपिक, शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर किया जा सके।
फेडरेशन ने अनुकंपा नियुक्ति पर लागू 10 प्रतिशत की सीमा हटाने, पंचायत सचिवों और संविदा कर्मियों के नियमितीकरण तथा कर्मचारियों की कमी को देखते हुए सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग भी रखी है।
इसके अलावा आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली को समाप्त करने और सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्तियों को बंद कर रिक्त पदों पर नियमित भर्ती शुरू करने की मांग भी कर्मचारियों ने उठाई है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने प्रदेश के सभी कर्मचारियों से 18 मार्च को होने वाले इस एकजुटता प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।

