छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने रायपुर के ‘स्वर्ण नगरी’ प्रोजेक्ट से जुड़े एक विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक खरीदार की रिफंड याचिका को खारिज कर दिया है । यह मामला रायपुर के रहमनीया चौक निवासी गजेंद्र सिंह रघुवंशी और प्रमोटर मेसर्स दाऊ बिल्डर्स के बीच का था । प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई खरीदार अपनी व्यक्तिगत वित्तीय अक्षमता के कारण बुकिंग रद्द करता है और प्रमोटर की ओर से कोई गलती नहीं पाई जाती, तो वह अधिनियम के तहत विशेष राहत का हकदार नहीं होगा ।
मामले के विवरण के अनुसार, आवेदक गजेंद्र सिंह ने जनवरी 2025 में बरौंडा स्थित ‘स्वर्ण नगरी’ प्रोजेक्ट में प्लॉट संख्या 148 की बुकिंग की थी । इसके लिए उन्होंने 51,000 रुपये की अग्रिम राशि का भुगतान किया था और कुल प्रतिफल 16,45,000 रुपये तय हुआ था । हालांकि, फरवरी 2025 के अंतिम सप्ताह में आवेदक ने अचानक आए वित्तीय संकट का हवाला देते हुए बुकिंग रद्द करने और अपनी टोकन राशि वापस करने का अनुरोध बिल्डर से किया । जब लंबे समय तक राशि वापस नहीं मिली, तो उन्होंने रेरा में शिकायत दर्ज कर ब्याज सहित रिफंड और मानसिक क्षतिपूर्ति की मांग की ।
सुनवाई के दौरान, प्रमोटर मेसर्स दाऊ बिल्डर्स की ओर से तर्क दिया गया कि प्रोजेक्ट का काम सुचारू रूप से चल रहा है और बुकिंग खरीदार की ओर से एकतरफा रद्द की गई है । बिल्डर का कहना था कि आवेदक ने प्लॉट को आठ महीने तक ब्लॉक करके रखा, जिससे उन्हें संभावित व्यावसायिक नुकसान हुआ है । उन्होंने यह भी दलील दी कि नियमों के अनुसार वे कुल विक्रय मूल्य का 10 प्रतिशत तक जब्त करने के हकदार हैं, जबकि आवेदक ने केवल टोकन राशि ही जमा की थी ।
प्राधिकरण के अध्यक्ष संजय शुक्ला और सदस्य धनंजय देवांगन की पीठ ने दस्तावेजों के अवलोकन के बाद पाया कि दोनों पक्षों के बीच कोई औपचारिक विक्रय अनुबंध निष्पादित नहीं हुआ था । रेरा ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि चूंकि आवेदक ‘आबंटिती’ की कानूनी श्रेणी में पूरी तरह फिट नहीं बैठते और प्रमोटर द्वारा अधिनियम के किसी प्रावधान का उल्लंघन साबित नहीं हुआ है, इसलिए यह मामला प्राधिकरण के विचारण क्षेत्राधिकार से बाहर है । पीठ ने माना कि इतने लंबे समय तक प्लॉट को सुरक्षित रखने के एवज में बुकिंग राशि जब्त करना प्रमोटर के दृष्टिकोण से अनुचित नहीं है और इसी के साथ शिकायत को निरस्त कर दिया गया ।

