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January 28, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने रियल एस्टेट सेक्टर में सेवा में कमी के एक महत्वपूर्ण मामले में ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने सृष्टि इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह परिवादी को उसके द्वारा भुगतान की गई कुल राशि 22,61,000 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे। इसके साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना और वाद व्यय का भुगतान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह पूरा मामला जांजगीर-चांपा निवासी 65 वर्षीय गिरधर प्रसाद चन्द्रा से जुड़ा है, जिन्होंने साल 2019 में सृष्टि इन्फ्राबिल्ड के ‘सृष्टि समृद्धि कालोनी’ बोदरी में दो प्लॉट (3ए और 3बी) खरीदे थे। गिरधर प्रसाद ने इन भूखंडों के लिए 21.63 लाख रुपये का भुगतान किया और जुलाई 2019 में रजिस्ट्री शुल्क के रूप में 98,000 रुपये भी जमा किए। रजिस्ट्री होने और राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज होने के बावजूद, जब उन्होंने वहां घर बनाने की अनुमति मांगी, तो उन्हें पता चला कि जमीन के उस हिस्से पर उच्च न्यायालय का स्थगन (Stay) आदेश प्रभावी है।
सीमांकन और कब्जे के लिए बिल्डर के चक्कर काटने और कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो गिरधर प्रसाद ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। सुनवाई के दौरान बिल्डर ने तर्क दिया कि अनुबंध के अनुसार प्राकृतिक या अपरिहार्य कारणों से निर्माण में देरी होने पर मुआवजा नहीं दिया जा सकता। हालांकि, अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों की पीठ ने पाया कि यह मामला निर्माण का नहीं बल्कि रजिस्ट्री के साढ़े छह साल बाद भी वास्तविक कब्जे का है।
आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि चूंकि सीमांकन विवाद के कारण परिवादी को प्लॉट का भौतिक कब्जा नहीं मिल सका, इसलिए यह सेवा में गंभीर कमी है। आयोग ने बिल्डर को निर्देश दिया है कि वह आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर पूरी राशि और ब्याज का भुगतान करे। साथ ही, भुगतान के बाद बिल्डर अपने खर्च पर उस रजिस्ट्री को रद्द कराने की प्रक्रिया कर सकेगा।
Case Reference : Girdhar Prasad Chandra Vs. Ms. Srishti Infrabuild Pvt. Ltd