Raipur : छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट अपीलीय न्यायाधिकरण ने घर खरीदारों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है । ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत नहीं भी है, तो भी उसके विवादों को सुलझाने का अधिकार रेरा के पास सुरक्षित है । यह फैसला न्यायमूर्ति शरद कुमार गुप्ता और सदस्य अरविंद सिंह चीमा की पीठ ने जयप्रकाश केसवानी बनाम मेसर्स एडमायर इंफ्राज़ोन प्राइवेट लिमिटेड के मामले में दिया है |
इस विवाद की शुरुआत रायपुर के सेजबहार स्थित ‘एडमायर ग्रीन्स’ प्रोजेक्ट से हुई थी । अपीलकर्ता जयप्रकाश केसवानी ने दिसंबर 2019 में 4,390 वर्ग फुट की एक यूनिट के लिए प्रमोटर के साथ अनुबंध किया था । इस सौदे की कुल कीमत ₹3,21,67,035 तय की गई थी, जिसमें से केसवानी ने ₹2,40,00,000 का भुगतान पहले ही कर दिया था । हालांकि, प्रमोटर द्वारा कब्जा नहीं दिए जाने पर केसवानी ने छत्तीसगढ़ रेरा में शिकायत दर्ज कराई । शुरुआत में, छत्तीसगढ़ रेरा ने इस शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह विवाद विशुद्ध रूप से दीवानी (सिविल) प्रकृति का है । प्रमोटर का तर्क था कि जिस फेज-2 में यह प्लॉट स्थित है, वह रेरा में पंजीकृत नहीं है, इसलिए रेरा इस पर सुनवाई नहीं कर सकता । रेरा ने प्रमोटर के इस तर्क को स्वीकार करते हुए क्षेत्राधिकार के अभाव में मामला बंद कर दिया था ।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने रेरा के इस आदेश को “अनुचित और त्रुटिपूर्ण” करार देते हुए रद्द कर दिया है । ट्रिब्यूनल ने रियल एस्टेट एक्ट 2016 की धारा 2(zn) की व्याख्या करते हुए कहा कि यदि किसी भूमि या भवन को बेचने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है, तो वह ‘रियल एस्टेट प्रोजेक्ट’ की श्रेणी में आता है । कानून के तहत यह आवश्यक नहीं है कि वह प्रोजेक्ट रेरा में पंजीकृत ही हो; क्षेत्राधिकार के लिए उसका ‘प्रोजेक्ट’ होना ही पर्याप्त है ।
न्यायाधिकरण ने अपने फैसले में जोर देकर कहा कि रियल एस्टेट अधिनियम की धारा 31 के तहत कोई भी पीड़ित व्यक्ति उल्लंघन की शिकायत दर्ज कर सकता है । इसके साथ ही धारा 79 स्पष्ट रूप से दीवानी अदालतों को उन मामलों में हस्तक्षेप करने से रोकती है जिन्हें सुलझाने का अधिकार रेरा को दिया गया है । ट्रिब्यूनल ने पाया कि केसवानी एक “आबंटी” हैं और प्रतिवादी एक “प्रमोटर” है, इसलिए रेरा को इस मामले की सुनवाई का पूरा अधिकार है ।
अंततः, ट्रिब्यूनल ने इस मामले को वापस रेरा के पास भेज दिया है और निर्देश दिया है कि दो महीने के भीतर कानून के अनुसार शिकायत का निपटारा किया जाए । न्यायाधिकरण ने दोनों पक्षों को 19 फरवरी 2026 को रेरा के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है और प्रमोटर पर अदालती खर्च का भार भी डाला है ।

