रायपुर, 18 फरवरी 2026 – उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने उपभोक्ता न्याय व्यवस्था को अधिक सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी क्रम में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तकनीकी सुधार, डिजिटल प्रणालियों के विस्तार, प्रक्रियात्मक बदलाव और संभावित विधायी संशोधनों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि ई-जागृति, ई-फाइलिंग और ई-हियरिंग जैसी डिजिटल सुविधाओं के प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से उपभोक्ता घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और ऑनलाइन सुनवाई में भाग ले सकते हैं। इससे न्याय प्रक्रिया अधिक सुलभ, पारदर्शी और किफायती बन रही है। साथ ही, उपभोक्ता मामलों के त्वरित और दक्ष निपटारे के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
प्रेस वार्ता के दौरान शिकायत स्वीकार करने की प्रक्रिया, उपभोक्ता आयोगों के आर्थिक और क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र तथा शिकायत और जवाब दाखिल करने की समय-सीमा जैसे अहम विषयों को स्पष्ट किया गया। अधिकारियों ने बताया कि यदि प्रतिवादी पक्ष निर्धारित 30 दिनों की अवधि या अधिकतम 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि, यानी कुल 45 दिनों में अपना लिखित बयान प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसके साक्ष्यों पर सीमित विचार किया जा सकता है। साथ ही प्रतिवादी को शिकायतकर्ता के गवाहों से जिरह का अवसर और उसकी सीमा से संबंधित प्रावधानों की भी जानकारी दी गई।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर बढ़ती चुनौतियों, डार्क पैटर्न जैसी भ्रामक डिजाइन तकनीकों और झूठे व भ्रामक विज्ञापनों के मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे। अधिकारियों और न्यायमूर्तियों ने माना कि क्षेत्राधिकार से जुड़े विवादों और तकनीकी जटिलताओं के त्वरित समाधान के लिए मौजूदा संरचना में सुधार की आवश्यकता है। निष्पादन आवेदनों के शीघ्र निपटारे में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों और प्रणालीगत देरी पर भी प्रकाश डाला गया।
सभी उपभोक्ता आयोगों में प्रक्रियात्मक एकरूपता लाने, मानकीकृत नियम और दिशानिर्देश लागू करने तथा केस मैनेजमेंट प्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित बनाने पर बल दिया गया। उपभोक्ता संरक्षण आयोग के अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार की यह पहल उपभोक्ताओं को त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक ठोस कदम है।

