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बिलासपुर उपभोक्ता फोरम का बड़ा फैसला: तकनीकी आधार पर बीमा दावा रोकना सेवा में कमी, स्टार हेल्थ इंश्योरेंस पर लगा जुर्माना

February 13, 2026 : जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, बिलासपुर ने बीमा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नजीर पेश करते हुए स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल तकनीकी दस्तावेजों की कमी का बहाना बनाकर किसी वैध बीमा दावे को “समय से पहले” (Premature) बताकर बंद करना सेवा में गंभीर कमी है।

यह मामला स्वर्गीय देवीदास वाधवानी का है, जिन्होंने जुलाई 2020 में स्टार हेल्थ से 10 लाख रुपये की व्यापक बीमा पॉलिसी ली थी। सितंबर 2020 में कोरोना संक्रमित होने के बाद, उन्हें बाद में उच्च रक्तचाप और सांस लेने में तकलीफ जैसी जटिलताएं हुईं। दिसंबर 2021 में हालत बिगड़ने पर उन्हें अपोलो अस्पताल, बिलासपुर में भर्ती कराया गया, जहाँ उनका इलाज इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD) और स्लीप एप्निया (OSA) के लिए किया गया।

जब उनके परिजनों ने 52,961 रुपये के चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए दावा पेश किया, तो बीमा कंपनी ने उसे यह कहते हुए अधर में छोड़ दिया कि इलाज करने वाले डॉक्टर ने बीमारी की सटीक अवधि के दस्तावेज नहीं दिए हैं। कंपनी ने इस दावे को न तो खारिज किया और न ही स्वीकृत, बल्कि इसे ‘पेंडिंग’ रखते हुए बंद कर दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान, अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्य पूर्णिमा सिंह व आलोक कुमार पांडे की पीठ ने पाया कि शिकायतकर्ता ने डॉक्टर के प्रमाण पत्र पेश किए थे, जिसमें स्पष्ट था कि पॉलिसी लेने से पहले उन्हें ऐसी कोई बीमारी नहीं थी। आयोग ने भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) के 2011 के उस परिपत्र का हवाला दिया, जो कंपनियों को केवल तकनीकी आधार पर दावे खारिज करने से रोकता है।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के ‘गुरमेल सिंह बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी’ मामले का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि बीमा कंपनियों को दावों का निपटारा करते समय अत्यधिक तकनीकी या मनमाना रवैया नहीं अपनाना चाहिए।

अदालत का आदेश

उपभोक्ता आयोग ने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस को आदेश दिया है कि वे शिकायतकर्ता के कानूनी वारिसों को 52,961 रुपये की पूरी चिकित्सा राशि का भुगतान करें। इसके साथ ही, शिकायत दर्ज होने की तारीख (11 मई 2023) से भुगतान की तारीख तक 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मानसिक प्रताड़ना के लिए 10,000 रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 5,000 रुपये का अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया है। यह भुगतान 45 दिनों के भीतर करना अनिवार्य है।

Case Reference : Devidas Wadhwani (Died) Through LRs. Vs. Star Health and Allied Ins. Co. Ltd.