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बिलासपुर उपभोक्ता फोरम का बड़ा फैसला: इंडसइंड बैंक को अनाधिकृत कटौती के लिए लगा झटका

February 3, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। आयोग ने इंडसइंड बैंक लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी पाते हुए ग्राहक से अवैध रूप से काटी गई राशि को ब्याज सहित वापस करने और मानसिक क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।

यह पूरा मामला देवनंदन नगर निवासी भरत लाल साहू से जुड़ा है, जिन्होंने साल 2023 में बैंक से अपने चार पहिया वाहन के लिए ₹4,88,250 का फाइनेंस कराया था। परिवादी ने अगस्त 2024 में अपने ऋण का एकमुश्त निपटान करने का निर्णय लिया और बैंक के निर्देशानुसार ₹4,52,800 का चेक जमा कर अपना खाता बंद कर दिया। हालांकि, ऋण चुकता होने के बावजूद बैंक ने उनके खाते से सितंबर 2024 में दो बार (₹2,200 और ₹8,070.81) अनाधिकृत रूप से राशि काट ली।

बैंक की इस लापरवाही और एनओसी (NOC) प्रदान करने में हुई देरी से परेशान होकर भरत लाल ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली। सुनवाई के दौरान बैंक ने स्वीकार किया कि तकनीकी त्रुटि और NACH होल्ड न होने के कारण अतिरिक्त कटौती हुई थी। बैंक ने मामले के दौरान एनओसी और कुछ राशि वापस करने की पेशकश भी की, लेकिन आयोग ने इसे पर्याप्त नहीं माना।

आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक को आदेश दिया कि वह काटी गई कुल राशि ₹10,270 परिवादी को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके साथ ही, उपभोक्ता को हुई मानसिक प्रताड़ना और वाद व्यय के लिए ₹5,000 का अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया है। यह फैसला स्पष्ट करता है कि ऋण अदायगी के बाद बैंकों द्वारा की जाने वाली कोई भी तकनीकी लापरवाही या सेवा में कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Case Reference : Bharat Lal Sahu Vs. Induslnd Bank Ltd

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