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February 27, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने एक बीमा धारक को मैच्योरिटी राशि का सही तरीके से भुगतान न करने को सेवा में कमी मानते हुए, एलआईसी को बकाया राशि और उस पर ब्याज सहित हर्जाना देने का निर्देश दिया है। यह मामला बिलासपुर निवासी श्रीमती इशरत सिद्दिकी से जुड़ा है, जिन्होंने वर्ष 2001 में एलआईसी की ‘जीवन स्नेह’ पॉलिसी ली थी।
पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक, हर पांच साल में बीमा राशि का 20 प्रतिशत ‘सरवाइवल बेनिफिट’ के रूप में दिया जाना था। यदि धारक यह राशि नहीं लेता है, तो उसे 11 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज की दर से मैच्योरिटी पर भुगतान किया जाना था। श्रीमती सिद्दिकी ने अपनी राशि का पुनर्निवेश किया था, लेकिन अगस्त 2021 में मैच्योरिटी के समय एलआईसी ने चक्रवृद्धि ब्याज के बजाय साधारण ब्याज के आधार पर गणना कर कम भुगतान किया। परिवादी का दावा था कि उन्हें 3,66,181 रुपये मिलने चाहिए थे, जबकि केवल 3,22,685 रुपये ही दिए गए।
सुनवाई के दौरान आयोग की सदस्य श्रीमती पूर्णिमा सिंह ने पाया कि विपक्षी कंपनी ने स्वीकार किया कि उन्होंने कुछ राशियों पर साधारण ब्याज लगाया था। आयोग ने इसे स्पष्ट रूप से सेवा में कमी माना। अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों की पीठ ने आदेश दिया कि एलआईसी 45 दिनों के भीतर परिवादी को अंतर की राशि 36,942 रुपये का भुगतान करे। साथ ही, इस राशि पर मार्च 2023 से भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, मानसिक परेशानी और वाद व्यय के लिए 10,000 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा भी मंजूर किया गया है।
Case Reference : Smt. Ishrat Siddiqui Vs. Life Insurance Corporation Of India