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इंश्योरेंस कंपनी को लगा झटका: दुर्घटना के दावे को गलत तरीके से खारिज करने पर उपभोक्ता आयोग ने सुनाया सख्त फैसला

January 9, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एसबीआई जनरल इंश्योरेंस (SBI General Insurance) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सेवा में कमी का दोषी पाया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह परिवादी को वाहन क्षति की राशि ब्याज सहित लौटाए और साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना भी भरे।

यह पूरा मामला राजकिशोर नगर, बिलासपुर निवासी सत्येंद्र कुमार सिंह की कार से जुड़ा है। सत्येंद्र सिंह की मारुति बलेनो कार का व्यापक बीमा एसबीआई जनरल इंश्योरेंस से कराया गया था। 1 मई 2022 को जब वे अपने परिवार के साथ रायगढ़ से बिलासपुर लौट रहे थे, तब चांपा के पास सड़क पर अचानक आए एक जानवर को बचाने के प्रयास में उनकी कार अनियंत्रित होकर खाई में पलट गई। इस हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना की सूचना तत्काल पुलिस और बीमा कंपनी को दी गई। वर्कशॉप के आकलन के अनुसार कार के सुधार का खर्च बीमा राशि (IDV) से भी अधिक हो गया था, जिसके चलते यह ‘टोटल लॉस’ का मामला था।

हालांकि, बीमा कंपनी ने 21 जुलाई 2022 को सत्येंद्र सिंह के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्होंने घटना के बारे में गलत जानकारी दी है। कंपनी का तर्क था कि एक अन्य व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, यह दुर्घटना दो वाहनों के बीच आमने-सामने की टक्कर थी, जबकि परिवादी ने इसे जानवर बचाने के दौरान हुआ हादसा बताया था।

मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों ने पाया कि बीमा कंपनी ने दावे को खारिज करने के लिए केवल दूसरी एफआईआर को आधार बनाया, जो कि घटना के काफी समय बाद और परोक्ष जानकारी पर आधारित थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी ने मौके के गवाहों या घायलों के बयान लेने की जहमत नहीं उठाई। साथ ही, आयोग ने माना कि यह संभव है कि जानवर को बचाने के चक्कर में कार अनियंत्रित हुई हो और उसी दौरान अन्य वाहन भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ हो।

अदालत ने बीमा कंपनी के रुख को सेवा में कमी मानते हुए आदेश दिया कि कंपनी सर्वेयर द्वारा आकलित राशि 5,35,256 रुपये का भुगतान 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करे। इसके अलावा, उपभोक्ता को हुई मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए 10,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये अलग से देने का निर्देश दिया गया है। आयोग के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि बीमा कंपनियां केवल तकनीकी खामियों या अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर ग्राहकों के वैध दावों को खारिज नहीं कर सकतीं।

Case Reference : Satyendra Kumar Singh Vs. SBI General Insurance Co. Ltd.

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