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January 2, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण की दिशा में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने ‘सृष्टि समृद्धि’ इन्फ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी पाते हुए एक पीड़ित महिला को उसकी जमा राशि ब्याज और भारी मुआवजे के साथ वापस करने का कड़ा निर्देश दिया है।
यह पूरा मामला सुजीता तिर्की नामक महिला से जुड़ा है, जिन्होंने साल 2018-19 में बोदरी स्थित सृष्टि समृद्धि कॉलोनी में एक मकान के निर्माण के लिए कंपनी के साथ अनुबंध किया था। इसके एवज में उन्होंने समय-समय पर कुल 24,25,500 रुपये का भुगतान किया। हालांकि, लंबे समय के इंतजार के बाद भी बिल्डर ने निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। केवल कुछ कॉलम और गड्ढे खोदकर काम को बीच में ही छोड़ दिया गया। जब सुजीता ने अपनी जमा राशि वापस मांगी, तो बिल्डर ने कंपनी के नियमों का हवाला देते हुए 20 प्रतिशत राशि काटने की धमकी दी और निर्माण में हो रही देरी का कारण हाईकोर्ट में चल रहे स्टे (स्थगन आदेश) को बताया।
इस मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों ने बिल्डर के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब बिल्डर ने साल 2018 में राशि प्राप्त कर ली थी, तो भूमि को निर्माण योग्य बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी थी। कोर्ट ने यह भी माना कि कानूनी पेचीदगियों या स्टे का बहाना बनाकर उपभोक्ता को वर्षों तक कब्जे से वंचित रखना अनुचित व्यापारिक प्रथा और सेवा में भारी कमी है।
आयोग ने अपने आदेश में ‘सृष्टि समृद्धि’ इन्फ्राबिल्ड को निर्देश दिया है कि वह सुजीता तिर्की को 21,25,500 रुपये की शेष राशि भुगतान करे। इसके साथ ही, इस राशि पर दिसंबर 2022 से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए 2 लाख रुपये का मुआवजा और 5,000 रुपये वाद व्यय के रूप में अलग से भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं। आयोग ने यह भी साफ किया कि संपूर्ण राशि का भुगतान होने के बाद ही पूर्व में निष्पादित विक्रय पत्र को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
Case Reference : Sujita Tirkey Vs. Srishti Samriddhi Infrabuild Pvt. Ltd