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February 5, 2026 : स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होने के बावजूद क्लेम खारिज करने वाली कंपनियों के लिए बिलासपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक कड़ा संदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है या नहीं, इसका फैसला बीमा कंपनी नहीं बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टर ही करेंगे। इस महत्वपूर्ण फैसले के साथ ही आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता की चिकित्सकीय राशि ब्याज सहित लौटाने और मानसिक क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
यह मामला पत्रकार कॉलोनी निवासी हिमांशु पुरोहित और उनकी पत्नी श्रीमती करिश्मा पुरोहित से जुड़ा है। उन्होंने स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से 5 लाख रुपये की ‘यंग स्टार इंश्योरेंस पॉलिसी’ ली थी। अक्टूबर 2024 में करिश्मा पुरोहित की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें खून की उल्टियां होने लगीं। आपातकालीन स्थिति में उन्हें बिलासपुर के श्रीराम केयर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे दो दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रहीं। इलाज के बाद जब परिवादी ने 33,253 रुपये का बीमा दावा प्रस्तुत किया, तो कंपनी ने उसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अस्पताल में भर्ती होना ‘चिकित्सकीय रूप से आवश्यक’ नहीं था। कंपनी ने अपनी पॉलिसी के ‘एक्लूजन कोड 36’ का हवाला देते हुए भुगतान से हाथ खींच लिए।
बीमा कंपनी के इस रवैये से परेशान होकर परिवादियों ने अधिवक्ता शिल्पा जोशी के माध्यम से उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग में सुनवाई के दौरान सदस्य आलोक कुमार पाण्डेय ने माना कि आपातकालीन स्थितियों में मरीज या उसके परिजन केवल सुरक्षा और सही इलाज पर ध्यान देते हैं। आयोग ने अपने आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई मरीज भर्ती होगा या नहीं, यह डॉक्टरों की विशेषज्ञता का विषय है। बीमा कंपनी अपनी शर्तों की आड़ में इसे तय नहीं कर सकती।
माननीय उच्चतम न्यायालय के ‘मनमोहन नंदा विरुद्ध यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस’ मामले का उदाहरण देते हुए आयोग ने कहा कि यदि बीमारी पॉलिसी से स्पष्ट रूप से बाहर नहीं है, तो बीमाकर्ता का कर्तव्य है कि वह खर्च की प्रतिपूर्ति करे। आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य श्रीमती पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने परिवाद को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर इलाज की पूरी राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करे। साथ ही, उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी और वाद व्यय के लिए 5,000 रुपये अतिरिक्त देने का आदेश भी पारित किया गया है।
Case Reference : Himanshu Purohit & Anr. Vs. Star Health And Allied Insurance Com. Ltd. & Anr