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February 17, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाते हुए पीड़ित ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक इलेक्ट्रिक स्कूटी के दुर्घटना दावे को यांत्रिक खराबी बताकर खारिज करने वाली एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को फटकार लगाई है। आयोग ने कंपनी को न केवल मरम्मत की राशि भुगतान करने का आदेश दिया, बल्कि मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना भरने का भी निर्देश दिया है।
यह पूरा मामला उरैहापारा बैमा नगोई निवासी जागेश्वर सूर्यवंशी से जुड़ा है। उन्होंने मई 2022 में लोकेश ऑटो से एक काइनेटिक ग्रीन इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदी थी, जिसकी वारंटी और बीमा दोनों वैध थे। सितंबर 2023 में जब उनकी बेटी और बेटा स्कूटी से जा रहे थे, तभी रास्ते में दो लड़ते हुए बैलों से बचने की कोशिश में उनकी गाड़ी एक भारी पत्थर से टकरा गई। इस हादसे में वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और दोनों बच्चों को गंभीर चोटें भी आईं।
हादसे के बाद जब जागेश्वर ने बीमा कंपनी के पास क्लेम फाइल किया, तो कंपनी ने सर्वेयर की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इसे ‘मैकेनिकल फेलियर’ यानी यांत्रिक खराबी बताकर खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि यह नुकसान किसी बाहरी टक्कर से नहीं हुआ है, इसलिए यह पॉलिसी के दायरे में नहीं आता। परेशान होकर पीड़ित ने अधिवक्ता श्रद्धा तिवारी के माध्यम से उपभोक्ता फोरम की शरण ली।
सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्य आलोक कुमार पाण्डेय ने पाया कि परिवादी की बेटी द्वारा दिया गया शपथ पत्र और अस्पताल के दस्तावेज दुर्घटना की पुष्टि करते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब दुर्घटना के प्रमाण मौजूद हैं, तो उसे केवल यांत्रिक खराबी मानकर क्लेम रोकना सेवा में कमी है।
अपने आदेश में आयोग ने विरोधी पक्ष क्रमांक 3 (बीमा कंपनी) को निर्देशित किया है कि वह 45 दिनों के भीतर सर्वेयर द्वारा आकलित राशि 11,708 रुपये का भुगतान 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ करे। इसके साथ ही, उपभोक्ता को हुई शारीरिक और मानसिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में 5,000 रुपये अतिरिक्त देने का फैसला सुनाया गया है।
Case Reference : Jagesar Suryavanshi Vs. Lokesh Auto & Ors