छत्तीसगढ़ के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और कृषि स्नातक संघ द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिकाओं (SLP) को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें 4 दिसंबर 2018 के संशोधित पदोन्नति नियमों को अवैध घोषित किया गया था।
शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद इन विवादित नियमों के तहत दी गई 582 पदोन्नतियां अब स्वतः निरस्त मानी जाएंगी और संबंधित अधिकारियों को अपने मूल पदों पर लौटना होगा।
इस निर्णय के बाद छत्तीसगढ़ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने बिलासपुर स्थित कर्मचारी भवन में बैठक आयोजित की। प्रांतीय अध्यक्ष विजय लहरे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 12 मार्च 2026 के फैसले को कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया गया।
मामले की पृष्ठभूमि में वर्ष 2010 के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में 2018 में किए गए संशोधन शामिल हैं, जिनसे अधिकारियों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही थी। इसे छत्तीसगढ़ पदोन्नति नियम 2003 के विरुद्ध बताते हुए 2019 में एमपी आड़े और अन्य ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
विचारण के दौरान भी विभाग ने जून 2021 से लगभग 585 कनिष्ठ अधिकारियों को पदोन्नत कर दिया था। हालांकि, अप्रैल 2022 में हाईकोर्ट ने इन संशोधनों को ‘अल्ट्रा वायर्स’ यानी विधि के विरुद्ध करार दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की अपील खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट का निर्णय पूरी तरह लागू हो गया है। इस मामले में कर्मचारी संघ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोएब आलम और उनकी टीम ने पैरवी की।

