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बलौदाबाजार-भाटापारा : छत्तीसगढ़ के कसडोल स्थित व्यवहार न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी) की अदालत ने एक महत्वपूर्ण उत्तराधिकार मामले में मृतक शासकीय कर्मचारी के परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया है। न्यायाधीश श्वेता मिश्रा की पीठ ने मृतक दिलहरण प्रसाद रत्नाकर की पत्नी और उनके चार बच्चों को कानूनी उत्तराधिकारी मानते हुए उन्हें बैंक जमा और विभागीय देयकों को प्राप्त करने का हकदार घोषित किया है।
यह मामला सितंबर 2024 में तब शुरू हुआ जब मृतक की पत्नी फुलकुमारी रत्नाकर और उनके बेटों चन्द्रप्रकाश, सूर्यप्रकाश, राघवेन्द्र और पुत्री भगवती ने न्यायालय में धारा 372 भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किया। दिलहरण प्रसाद रत्नाकर जनपद पंचायत बिलाईगढ़ में विकास विस्तार अधिकारी के पद पर कार्यरत थे, जिनका 5 अक्टूबर 2023 को रायपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया था।
मृतक के नाम पर भारतीय स्टेट बैंक की सहसपुर लोहारा शाखा में 3,12,000 रुपये जमा थे और विभाग से लगभग 12,86,520 रुपये की ग्रेच्युटी राशि मिलनी शेष थी। बैंक और संबंधित विभाग ने इन राशियों के भुगतान और अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की मांग की थी। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों, मृत्यु प्रमाण पत्र और गवाहों के बयानों के आधार पर पाया कि आवेदक ही मृतक के वास्तविक वारिस हैं।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कुल राशि का वितरण सभी पांचों आवेदकों के बीच समान रूप से यानी 1/5-1/5 हिस्से में किया जाएगा। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि नियमानुसार न्यायशुल्क अदा करने के बाद आवेदकों को औपचारिक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाए। इस फैसले से लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में फंसे परिवार को अब आर्थिक राहत और भविष्य की नियुक्तियों के लिए मार्ग प्रशस्त होगा।