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January 20, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के खिलाफ एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें ‘पुरानी बीमारी छिपाने’ का हवाला देकर डेथ क्लेम को रोका गया था। अदालत ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया है कि वह परिवादी को मृत्यु लाभ के रूप में एक करोड़ रुपये की राशि का भुगतान करे।
यह मामला बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी पत्नी स्वर्गीय श्रीमती शैल कौशिक के नाम पर ‘मैक्स लाइफ प्लेटिनम वेल्थ प्लान’ पॉलिसी ली थी। दुर्भाग्यवश, अक्टूबर 2020 में कोरोना संक्रमण के चलते उनकी पत्नी का निधन हो गया। जब कौशल प्रसाद ने बीमा राशि के लिए दावा पेश किया, तो कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि पॉलिसी धारक ने वर्ष 2016 की अपनी कुछ हृदय संबंधी बीमारियों की जानकारी छिपाई थी।
आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों ने मामले की सूक्ष्मता से जांच की। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पॉलिसी जारी करने से पहले कंपनी के पैनल में शामिल डॉक्टरों ने बीमित महिला का विस्तृत मेडिकल चेकअप किया था और उन्हें पूर्णतः स्वस्थ पाया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा नियामक IRDAI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल वही बीमारियाँ ‘पुरानी बीमारी’ (Pre-Existing Disease) की श्रेणी में आती हैं जो पॉलिसी लेने के 48 महीने के भीतर हुई हों। इस मामले में कथित उपचार चार साल से अधिक पुराना था, जिसे आधार बनाकर क्लेम रोकना पूरी तरह अनुचित पाया गया।
अदालत ने अपने फैसले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कंपनी ने स्वयं की संतुष्टि के बाद पॉलिसी जारी की थी, तो मृत्यु के बाद पुरानी बीमारी का बहाना बनाना ‘सेवा में कमी’ और व्यावसायिक कदाचरण है। फैसले के मुताबिक, कंपनी द्वारा पूर्व में लौटाए गए 10 लाख रुपये के प्रीमियम को समायोजित करने के बाद, अब उसे 90 लाख रुपये की शेष राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देनी होगी। इसके अलावा, मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 25,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये अतिरिक्त देने के आदेश दिए गए हैं।
Case Reference : Kaushal Prasad Kaushik Vs. Max Life Insurance Co. Ltd. & Anr