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  • परलकोट क्रांति 1824-25: बस्तर के पहिली शहादत के गाथा

    छत्तीसगढ़ की जनजातीय गौरव गाथा (क्रांति) | LawNotify.in Tribal Pride and Revolutionary Legacy of Chhattisgarh

    छत्तीसगढ़ के इतिहास म 1818 ले 1830 तक के समय ला ब्रिटिश नियंत्रण काल कहे जाथे। ए दौर म नागपुर के भोंसला राज अंग्रेज शासन के एजेंट के रूप म स्थापित हो गे रहिन। ऊपर ले देखे जावय त राज भोंसला मन के लगत रहिस, फेर असली ताकत अंग्रेज रेसीडेंट के हाथ म रहिस। अंग्रेज प्रशासनिक व्यवस्था, कर वसूली अउ स्थानीय जमींदार मन संग संबंध के ढांचा तय करिन। ए सब बदलाव के सीधा असर छत्तीसगढ़ अउ खासकर बस्तर अंचल म दिखे लगिस।

    1818 ले 1825 के बीच छत्तीसगढ़ के अधीक्षक मिस्टर एगन्यू रहिन। एही समय परलकोट अंचल म मराठा अउ अंग्रेज अधिकारी मन के सक्रिय उपस्थिति बढ़ गे रहिस। ठेकेदारी प्रथा, कर वसूली अउ बाहरी हस्तक्षेप ले अबूझमाड़िया अउ हलबा जनजाति मन म असंतोष गहराय लगिस। ओमन ला अपन सभ्यता, परंपरा अउ जमीन ऊपर खतरा महसूस होवत रहिस। धीरे-धीरे ए असंतोष विद्रोह के रूप ले लेइस।

    परलकोट के भूमिया राजा वीर गैंदसिंह ए आंदोलन के अगुवाई करिन। ओमन जनजाति समाज ला एकजुट करके विदेशी सत्ता ला हटाय के आह्वान करिन। ओमन के सपना अइसन समाज के रहिस जिहां शोषण, लूट-खसोट अउ अन्याय नई होवय। 24 दिसंबर 1824 ले बस्तर के अबूझमाड़िया जनजाति मन परलकोट म जुटना शुरू कर दिन। कुछे दिन म ए आंदोलन अबूझमाड़ ले चांदा तक फैल गे।

    रात के समय गोटुल म क्रांतिकारी मन जुटके धनुष-बाण, भाला अउ कुल्हाड़ी जइसन पारंपरिक हथियार मन ला तैयार करथें अउ अगले दिन के रणनीति बनाथें। अलग-अलग परगना मांझी अपन-अपन टुकड़ी के नेतृत्व करथें। छापामार नीति अपनाके ओमन अचानक हमला करथें, पहाड़ी अउ जंगल के सहारा ले दुश्मन ला घेर लेथें। नगाड़ा के आवाज संकेत बन जाथे अउ देखते-देखते सैकड़ों जनजाति योद्धा हमला म उतर जाथें। ए हमलामन ले मराठा अउ अंग्रेज फौज म दहशत फैल गे रहिस।

    स्थिति गंभीर होवत देख 4 जनवरी 1825 ला कैप्टन पेव के नेतृत्व म चांदा ले सेना बुलाय गिस। मराठा अउ अंग्रेज संयुक्त फौज गांव-गांव तलाशी लेके जनजाति मन ऊपर कड़ा कार्रवाई करिन। घर जलाय गिस, लोगन ला पकड़ाय गिस, फेर घलो जनजाति मन के हिम्मत नई टूटिस। बंदूक के सामना धनुष-बाण ले करना कठिन रहिस, फेर संघर्ष जारी रहिस।

    10 जनवरी 1825 ला संयुक्त सेना परलकोट ला चारों ओर ले घेर लिन। भीषण लड़ाई होइस। राजा गैंदसिंह के रक्षा करत रमोतीन बाई अपन बलिदान दे दिन। आखिरकार फौज पहाड़ी ऊपर बने महल तक पहुंच गे अउ राजा गैंदसिंह ला गिरफ्तार कर लीन गिस। ओमन ऊपर मुकदमा चलाय गिस अउ 20 जनवरी 1825 ला परलकोट के पहाड़ी म बने महल के सामने फांसी दे दीस।

    परलकोट क्रांति सैन्य रूप ले भले सफल नई हो पाइस, फेर ए आंदोलन बस्तर के जनजाति अस्मिता अउ स्वाभिमान के प्रतीक बन गे। वीर गैंदसिंह बस्तर के पहिली शहीद के रूप म याद करे जाथें। ए क्रांति बताथे के छत्तीसगढ़ के माटी म आजादी के बीज बहुत पहिली बो दिये गे रहिन, जऊन बाद म बड़े स्वतंत्रता संग्राम के आधार बनिन।

    (श्रेय – आदिशौर्य : छत्तीसगढ़ की जनजातीय गौरव गाथा)

    लेखिका परिचय : श्रीमती संपदा दुबे ने छत्तीसगढ़ी विषय में स्नातकोत्तर (एम.ए.) किया है और वे बिलासपुर, छत्तीसगढ़ की निवासी हैं। वे छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य की गंभीर अध्येता तथा समर्पित लेखिका हैं। क्षेत्रीय भाषा के संरक्षण, संवर्धन और उसे संवैधानिक पहचान दिलाने से जुड़े विषयों पर उनका विशेष ध्यान रहता है।

    छत्तीसगढ़ी के इतिहास, व्याकरण, लोकसाहित्य तथा संविधान की 8वीं अनुसूची में इसके समावेश जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर वे शोधपरक और जागरूकतापूर्ण लेखन करती हैं। Email Id: vlograghav1@gmail.com

    Law Notify Team

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