रायपुर, 18 फरवरी 2026: सूचना आधारित दौर में सटीक और विश्वसनीय आंकड़ों को सुशासन की नींव बताते हुए पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल ने कहा कि नीति निर्माण, योजना निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों में सांख्यिकी की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों के पास प्रमाणिक और व्यवस्थित आंकड़े होते हैं, वे समय के साथ रणनीतिक बढ़त हासिल करते हैं।
वे विश्वविद्यालय की सांख्यिकी अध्ययन शाला द्वारा राष्ट्रीय सांख्यिकी तंत्र प्रशिक्षण अकादमी के सहयोग से एम.एल. श्रॉफ सभागार में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला “आधिकारिक सांख्यिकी तथा भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली के प्रति जागरूकता एवं संवेदनशीलता” के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कुलपति ने कहा कि सांख्यिकी का दायरा लगातार विस्तार पा रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों के उपयोग से विश्लेषण की प्रक्रिया नई दिशा ले रही है। उन्होंने उच्च शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए द्वैध उपाधि कार्यक्रमों और संसाधन साझेदारी जैसे नवाचारों की भी चर्चा की।
राष्ट्रीय सांख्यिकी तंत्र प्रशिक्षण अकादमी, जो भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन कार्यरत है, क्षमता निर्माण के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में काम करती है। यह अकादमी सर्वेक्षण पद्धति, आंकड़ा विश्लेषण, मशीन लर्निंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करती है। कार्यशाला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अन्य हितधारकों को आधिकारिक सांख्यिकी और भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली की संरचना तथा महत्व से परिचित कराना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, रायपुर के क्षेत्रीय कार्यालय के उप महानिदेशक अल्ताफ हुसैन हाजी उपस्थित रहे। राष्ट्रीय सांख्यिकी तंत्र प्रशिक्षण अकादमी के निदेशक शिव बालक वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, रायपुर की उप निदेशक सचिता राकेश अग्रवाल भी मंचासीन रहीं।
सांख्यिकी अध्ययन शाला के अध्यक्ष प्रो. डी.के. गंगेश्वर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई।
अपने संबोधन में अल्ताफ हुसैन हाजी ने आधिकारिक और प्रशासनिक सांख्यिकी के महत्व को रेखांकित करते हुए जनगणना और आर्थिक गणना सहित विभिन्न सर्वेक्षण प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय साक्षरता आज की आवश्यकता है और इस क्षेत्र में युवाओं के लिए व्यापक रोजगार अवसर मौजूद हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से सांख्यिकी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि शिव बालक वर्मा ने कहा कि आंकड़े आज राष्ट्रीय संपदा के रूप में उभर रहे हैं और किसी भी देश के विकास का आकलन अब डेटा के आधार पर किया जाता है। उन्होंने सांख्यिकी को विकास की व्याकरण बताते हुए डेटा विज्ञान की बढ़ती उपयोगिता पर जोर दिया।
सचिता राकेश अग्रवाल ने राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की भूमिका और विभिन्न संचालित सर्वेक्षणों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधिकारिक आंकड़े नीति निर्माण, निगरानी और मूल्यांकन की प्रक्रिया में किस तरह सहायक सिद्ध होते हैं।
कार्यशाला में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। विचार-विमर्श के दौरान सुशासन और नीति निर्माण में आधिकारिक सांख्यिकी की भूमिका, आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता, पारदर्शिता और नैतिक मानकों के महत्व के साथ-साथ आंकड़ा संकलन, प्रसंस्करण और प्रसार से जुड़ी चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

