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राज्यसभा में आज आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई, जिसे लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है। यह विधेयक 2014 के मूल अधिनियम में संशोधन करता है और अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र राजधानी के रूप में वैधानिक मान्यता प्रदान करता है।
चर्चा में भाग लेते हुए केंद्रीय मंत्री के. राममोहन नायडू ने इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि आंध्र प्रदेश के पांच करोड़ लोगों के गौरव, विश्वास और लोकतांत्रिक भरोसे की बहाली है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश बिना राजधानी के रह गया था और 16,000 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे से जूझ रहा था। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के समय बने छत्तीसगढ़ और झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि आंध्र का विभाजन उस गरिमा के साथ नहीं किया गया था।
वहीं, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता रेणुका चौधरी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्र और संसद पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अमरावती को औपचारिक राजधानी घोषित करने में हुई 12 साल की देरी को एक ऐतिहासिक विफलता करार दिया। उन्होंने कहा कि संसद के पटल पर किए गए वादे को एक दशक तक लटकाए रखा गया, जिससे राज्य अनिश्चितता के दौर में रहा। हालांकि, उन्होंने इस विधेयक का समर्थन किया और इसे अमरावती के उन किसानों की जीत बताया, जिन्होंने पुलिस के दबाव और उत्पीड़न के बावजूद वर्षों तक अपना संघर्ष जारी रखा।