March 21, 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम मामले में नोटिस जारी किया है। यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एक प्रोबेशन पर काम कर रहे कर्मचारी को LL.B के तीसरे साल में रेगुलर स्टूडेंट के तौर पर परीक्षा देने की अनुमति दी गई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 20 मार्च 2026 को सुनवाई के दौरान नोटिस जारी किया और मामले को 20 अप्रैल 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है।
मामले के अनुसार, संबंधित कर्मचारी को सितंबर 2022 में असिस्टेंट ग्रेड-III के पद पर नियुक्त किया गया था और वह तीन साल की प्रोबेशन अवधि पर था। उसकी नियुक्ति की शर्तों में स्पष्ट था कि पहले साल में बिना अनुमति के आगे की पढ़ाई नहीं की जा सकती। कर्मचारी ने LL.B के पहले और दूसरे वर्ष की पढ़ाई के लिए विभाग से अनुमति प्राप्त कर ली थी।
इसके बाद 6 अक्टूबर 2023 को छत्तीसगढ़ डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियरी एस्टैब्लिशमेंट (भर्ती और सेवा शर्तें) नियम, 2023 लागू हो गए। इन नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को रेगुलर कैंडिडेट के रूप में पढ़ाई करने की अनुमति नहीं है। केवल प्राइवेट या कॉरेस्पोंडेंस माध्यम से पढ़ाई की जा सकती है, वह भी नियुक्ति प्राधिकारी की अनुमति से।
जब कर्मचारी ने LL.B के तीसरे वर्ष की परीक्षा रेगुलर स्टूडेंट के रूप में देने की अनुमति मांगी, तो नियुक्ति प्राधिकारी ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद कर्मचारी ने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां सिंगल जज ने उसके पक्ष में फैसला देते हुए उसे परीक्षा देने की अनुमति दे दी।
हालांकि, इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी गई, जहां सिंगल जज के आदेश को रद्द कर दिया गया। इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन के माध्यम से चुनौती दी गई।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नोटिस जारी कर दिया है और अभी इस मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है।
Case Reference : SLP (C) No. 9672/2026, Ajit Choubelal Gohra v. High Court of Chhattisgarh & Others

