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  • छत्तीसगढ़ रेरा का सख्त रुख: गैलेक्सी न्यू टाउन में निर्माण दोषों की मरम्मत का आदेश, ठेकेदार की आपत्ति खारिज

    Chhattisgarh Real Estate Regulatory Authority | CG RERA

    रायपुर, 18 फरवरी 2026 – Chhattisgarh Real Estate Regulatory Authority (रेरा), रायपुर ने गैलेक्सी न्यू टाउन परियोजना में निर्माण संबंधी खामियों की शिकायत पर एक निजी सिविल ठेकेदार को मरम्मत कार्य करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 18 फरवरी 2026 को पारित किया गया। मामला रायपुर जिले के तुलसी गांव स्थित एक पंजीकृत रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में कथित दोषपूर्ण निर्माण से जुड़ा था।

    शिकायतकर्ता पवन तिवारी, प्लॉट नंबर 101, गैलेक्सी न्यू टाउन फेज-II के मालिक हैं। उन्होंने प्राधिकरण को बताया कि जनवरी 2022 में कब्जा मिलने के बाद तीन वर्ष के भीतर गंभीर निर्माण दोष सामने आने लगे। उनके अनुसार घर की टाइलें उखड़ गईं, दीवारों में दरारें आ गईं, सीपेज की समस्या उत्पन्न हो गई और पानी की टंकी को सहारा देने वाली दीवार में स्पष्ट क्षति दिखाई दी। बार-बार आग्रह के बावजूद खामियां दूर नहीं की गईं, जिसके बाद उन्होंने रेरा में औपचारिक शिकायत दायर की।

    यह परियोजना रेरा में पंजीकरण संख्या PCGRERA150618000208 के तहत दर्ज है। परियोजना के प्रमोटर के रूप में स्वास्तिक डेवलपर्स का नाम दर्ज है, जबकि निर्माण कार्य से जुड़े निजी सिविल ठेकेदार के रूप में उमेश ब्रह्मांकर, जो वीनस इंफ्रा से संबद्ध हैं, को कार्यवाही में पक्षकार बनाया गया।

    ठेकेदार की आपत्ति और रेरा का निष्कर्ष

    ठेकेदार ने दलील दी कि वह केवल व्यक्तिगत प्लॉट मालिक के साथ हुए निजी निर्माण अनुबंध के तहत कार्यरत था। उसका कहना था कि उसने परियोजना में किसी भी यूनिट का विपणन, बिक्री या विज्ञापन नहीं किया और न ही खरीदारों से कोई विक्रय मूल्य प्राप्त किया। इस आधार पर उसने तर्क दिया कि वह रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 के तहत “प्रमोटर” की परिभाषा में नहीं आता, इसलिए रेरा के पास उस पर अधिकार क्षेत्र नहीं है।

    प्राधिकरण ने अधिनियम की धारा 2(ज़ेडके) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति बिक्री के उद्देश्य से अपार्टमेंट या भवन का निर्माण करता है या करवाता है, वह प्रमोटर की श्रेणी में आ सकता है। रेरा ने 24 दिसंबर 2019 के अपने परिपत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई ठेकेदार आठ से अधिक इकाइयों का निर्माण करता है, तो उसे सह-प्रमोटर के रूप में पंजीकरण की आवश्यकता हो सकती है। सुनवाई के दौरान ठेकेदार ने स्वीकार किया कि उसने आठ से अधिक इकाइयों का निर्माण किया है। इस आधार पर रेरा ने उसकी अधिकार क्षेत्र संबंधी आपत्ति खारिज कर दी और शिकायत को धारा 31 के तहत सुनवाई योग्य माना।

    समयसीमा पर भी स्पष्टता

    प्राधिकरण ने यह भी पाया कि संपत्ति का कब्जा जनवरी 2022 में दिया गया था, जबकि शिकायत 24 मई 2025 को दायर की गई। धारा 14(3) के तहत कब्जा तिथि से पांच वर्ष की दोष दायित्व अवधि लागू होती है। इसलिए आवेदन समयसीमा के भीतर माना गया।

    मरम्मत के लिए निर्देश

    सुनवाई के दौरान ठेकेदार ने कुछ खामियों को स्वीकार करते हुए उन्हें ठीक करने की सहमति दी। इनमें ऊपरी बाथरूम में सीपेज की समस्या, टूटे हुए कमोड का प्रतिस्थापन, लाइटिंग डक्ट क्षेत्र में उखड़ी ईंट की मरम्मत और दीवारों में दिखाई देने वाली दरारों को ठीक करना शामिल है।

    रेरा ने शिकायत का निपटारा करते हुए ठेकेदार को निर्देश दिया कि वह प्लॉट नंबर 101 में निर्दिष्ट मरम्मत कार्य 15 मार्च 2026 तक पूरा करे। आदेश में स्पष्ट रूप से उपर्युक्त सभी खामियों को दूर करने का निर्देश दिया गया है।

    व्यापक प्रभाव

    यह आदेश स्पष्ट संकेत देता है कि पंजीकृत परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार केवल स्वयं को “निजी सिविल ठेकेदार” बताकर नियामक निगरानी से बच नहीं सकते। यदि उनकी भूमिका अधिनियम में परिभाषित प्रमोटर की श्रेणी में आती है, तो वे रेरा के अधिकार क्षेत्र में आएंगे।

    मामला संदर्भ: पवन तिवारी बनाम स्वास्तिक डेवलपर्स

    Law Notify Team

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