Saturday, 29 August, 2026

बिलासपुर उपभोक्ता फोरम का बड़ा फैसला: बीमा कंपनी को क्लेम देने और मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना भरने का आदेश


Consumer Protection

February 16, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा सेवाओं में कमी को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने मैग्मा एच.डी.आई. जनरल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह परिवादी को न केवल वाहन दुर्घटना की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करे, बल्कि मानसिक कष्ट और वाद व्यय के लिए हर्जाना भी दे।

यह मामला श्रीमती शांति सेन्ड्री के स्वामित्व वाली हुंडई ग्रैंड i-10 कार से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, परिवादी का वाहन 27 दिसंबर 2019 को एक दुर्घटना का शिकार हो गया था। वाहन का बीमा मैग्मा एच.डी.आई. जनरल इंश्योरेंस से कराया गया था, जो दुर्घटना के समय वैध था। दुर्घटना के बाद जब परिवादी ने क्षतिपूर्ति का दावा पेश किया, तो बीमा कंपनी ने इसे इस आधार पर खारिज कर दिया कि सर्वेयर के निरीक्षण से पहले ही वाहन की मरम्मत करा ली गई थी, जो पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है।

आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्य आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि बीमा कंपनी अपने इस दावे को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी कि वाहन का सर्वे से पहले सुधार कराया गया था। दूसरी ओर, बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने स्वयं अपनी रिपोर्ट में क्षति का आकलन 26,190 रुपये किया था।

आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वाहन बीमित अवधि में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था और बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर सेवा में कमी की है। अदालत ने मैग्मा एच.डी.आई. जनरल इंश्योरेंस को निर्देश दिया है कि वह आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर सर्वेयर द्वारा आंकलित 26,190 रुपये की राशि का भुगतान करे। इसके साथ ही, परिवाद पेश करने की तिथि यानी 9 दिसंबर 2020 से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने का आदेश दिया गया है। आयोग ने परिवादी को हुई मानसिक परेशानी के लिए 5,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये की अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत की है।

Case Reference : Smt. Shanti Sendry Vs. Magma H.D.I. Gen. Ins. Co. Ltd. & Ors.

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