भिलाई नगर के चर्चित लगभग 165 करोड़ रुपये के यस बैंक घोटाले मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए संपूर्ण जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने विस्तृत आदेश पारित किया।
कोर्ट ने राज्य सरकार की अब तक की जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यस बैंक द्वारा तथ्यों को छिपाने और अपूर्ण जानकारी प्रस्तुत करने के कारण निष्पक्ष जांच संभव नहीं हो पा रही थी। ऐसे में सीबीआई जांच ही उचित विकल्प है। अदालत ने दुर्ग-भिलाई पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, साक्ष्य और जानकारियां सीबीआई को सौंपी जाएं। इसमें अनिमेष सिंह की ओर से दर्ज एफआईआर और हितेश चौबे की काउंटर एफआईआर से संबंधित सभी विवरण शामिल हैं।
याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और अब तक की कार्यवाहियों का भी आदेश में विस्तार से उल्लेख किया गया है। कोर्ट ने मामले से जुड़े व्यक्तियों, अधिकारियों और विभागों के बीच हुए पत्राचार और प्रक्रियाओं का भी विश्लेषण किया।
मिश्रा ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला गंभीर है और प्रदेश की राजनीति पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पारदर्शिता स्थापित करना और दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचाना है।
अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी के अनुसार, हाईकोर्ट ने सीबीआई को इस मामले में नई एफआईआर दर्ज करने का निर्देश भी दिया है। अगली सुनवाई अप्रैल 2026 में निर्धारित की गई है।
मामले के तकनीकी पहलुओं पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई। विशेष रूप से यस बैंक की सुपेला शाखा द्वारा अनिमेष सिंह के खाते के लेनदेन की पूरी जानकारी नहीं देने पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि बैंक ने तथ्यों को छिपाया और जांच एजेंसियों को अधूरी जानकारी दी। साथ ही राज्य की जांच प्रक्रिया को भी केवल औपचारिक बताते हुए आलोचना की गई।

