Thursday, 15 October, 2026

अधूरे मकान का सपना छोड़ भागा ठेकेदार, बिलासपुर उपभोक्ता आयोग ने लगाया 5.20 लाख का जुर्माना


Consumer Protection

February 6, 2026 : सपनों का आशियाना संवारने का झांसा देकर लोगों की जमा पूंजी डकारने वाले लापरवाह ठेकेदारों पर अब कानून का शिकंजा कसने लगा है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मकान रिनोवेशन का काम बीच में छोड़ने वाली निर्माण कंपनी को फटकार लगाई है। आयोग ने सेवा में गंभीर कमी पाते हुए निर्माण एजेंसी को ग्राहक की पूरी अग्रिम राशि ब्याज सहित लौटाने और मानसिक क्षतिपूर्ति देने का कड़ा आदेश दिया है ।

यह मामला जूना बिलासपुर निवासी यशवंत कुमार थवाईत और उनकी पत्नी श्रीमती नीनी थवाईत से जुड़ा है । उन्होंने जनवरी 2023 में अपने मकान के भूतल और प्रथम तल के रिनोवेशन के लिए ‘मेसर्स श्री महालक्ष्मी कंस्ट्रक्शन एण्ड इन्टीरियर डिजाईन’ के प्रोपराईटर यशु दास मानिकपुरी के साथ 13 लाख रुपये का अनुबंध किया था । काम शुरू करने के लिए परिवादी ने विभिन्न किश्तों में कुल 6 लाख रुपये अग्रिम तौर पर भुगतान कर दिए थे ।

निर्माण कार्य शुरू तो हुआ, लेकिन ठेकेदार ने केवल 80,000 रुपये का शुरुआती काम (बेसमेंट तक) करने के बाद अप्रैल 2023 में अचानक काम बंद कर दिया और साइट छोड़कर फरार हो गया । पीड़ित परिवार ने जब अपनी जमा पूंजी वापस मांगी, तो ठेकेदार ने उन्हें तीन चेक थमा दिए, जो बैंक में लगाने पर बाउंस हो गए । थक-हारकर थवाईत परिवार को दूसरे ठेकेदार से अधिक पैसे खर्च कर अपना काम पूरा करवाना पड़ा और न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा ।

मामले की सुनवाई के दौरान विपक्षी ठेकेदार आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और बैंक स्टेटमेंट्स के आधार पर एकपक्षीय कार्रवाई की । आयोग की सदस्य श्रीमती पूर्णिमा सिंह, अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्य आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने पाया कि ठेकेदार ने न केवल काम अधूरा छोड़ा, बल्कि अग्रिम राशि हड़पकर सेवा में भारी कमी की है ।

आयोग ने अपने फैसले में ‘मेसर्स श्री महालक्ष्मी कंस्ट्रक्शन’ को आदेश दिया है कि वह परिवादी को 5,20,000 रुपये की बकाया राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए । इसके अतिरिक्त, मानसिक प्रताड़ना के लिए 5,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान भी 45 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया गया है ।

Case Reference : Yashvant Kumar Thavait Vs. M/s Shree Mhalaxmi Construction