Saturday, 29 August, 2026

बीमा कंपनी को तगड़ा झटका: छत्तीसगढ़ उपभोक्ता आयोग ने कहाअनुग्रह राशि की कटौती ‘सेवा में कमी’


Consumer Protection

January 29, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा दावों के निपटान को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा नक्सली हिंसा या अन्य आपदाओं के मामले में दी जाने वाली ‘अनुग्रह राशि’ (Ex-gratia amount) को बीमा कंपनी अपने कुल दावे की राशि से काट नहीं सकती। ऐसा करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है ।

यह मामला मेसर्स धंगल बिल्डर्स और युनाईटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के बीच का है। परिवादी धंगल बिल्डर्स का टाटा हाईवा वाहन (CG-10-AG-6659) बीजापुर जिले के कुटरू थाना क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य के दौरान 29 जनवरी 2020 को नक्सलियों द्वारा आग लगा दिए जाने के कारण पूरी तरह नष्ट हो गया था । वाहन का बीमा 25,50,000 रुपये की आई.डी.व्ही. (IDV) पर कराया गया था ।

घटना के बाद, जिला दण्डाधिकारी बीजापुर ने नक्सली हिंसा में हुई क्षति के लिए परिवादी को 3,00,000 रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की थी । वहीं, बीमा कंपनी ने सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर कुल देय राशि 21,48,500 रुपये निर्धारित की, लेकिन इसमें से शासन द्वारा दी गई 3 लाख रुपये की अनुग्रह राशि काटकर केवल 18,48,500 रुपये का ही भुगतान किया । बीमा कंपनी का तर्क था कि चूंकि परिवादी को शासन से सहायता मिल चुकी है, इसलिए बीमा अनुबंध के क्षतिपूर्ति सिद्धांत के अनुसार वह पूरी राशि का हकदार नहीं है ।

आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों श्रीमती पूर्णिमा सिंह एवं आलोक कुमार पाण्डेय की पीठ ने इस तर्क को खारिज कर दिया । आयोग ने पाया कि बीमा पॉलिसी के नियमों और शर्तों में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि किसी अन्य स्रोत से प्राप्त अनुग्रह राशि को बीमा दावे से काटा जाएगा । विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायदृष्टांतों का हवाला देते हुए आयोग ने माना कि शासन की सहायता राशि और बीमा कंपनी का अनुबंध दो अलग-अलग विषय हैं ।

आयोग का मुख्य आदेश: उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह काटी गई 3,00,000 रुपये की राशि 45 दिनों के भीतर परिवादी को लौटाए । साथ ही, इस राशि पर परिवाद प्रस्तुत करने की तिथि (26.12.2022) से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा । इसके अलावा, मानसिक कष्ट के लिए 25,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का निर्देश दिया गया है ।

Case Reference : M/S Dhangal Builders Vs. United India Insurance Co. Ltd.

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