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अधूरा मकान छोड़ना ठेकेदार को पड़ा भारी: उपभोक्ता फोरम ने सुनाया ₹6 लाख लौटाने और मुआवजे का कड़ा फैसला

February 27, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में घर बनाने का सपना देख रहे दो भाइयों के साथ वादाखिलाफी करना एक निर्माण ठेकेदार को काफी महंगा साबित हुआ है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सेवा में कमी का दोषी पाते हुए ठेकेदार को आदेश दिया है कि वह ग्राहकों से ली गई अतिरिक्त राशि ब्याज सहित वापस करे और उन्हें हुए मानसिक कष्ट के लिए उचित मुआवजा भी दे।

यह मामला सरकंडा निवासी लक्ष्मण श्रीवास और शत्रुहन श्रीवास से जुड़ा है। उन्होंने साल 2022 में लक्ष्मण साहू नामक ठेकेदार के साथ अपने-अपने 910 वर्ग फीट के भूखंडों पर मकान निर्माण के लिए एक इकरारनामा किया था। समझौते के तहत निर्माण की कुल लागत प्रति मकान ₹10.35 लाख तय की गई थी। परिवादियों ने ठेकेदार के प्रति अपना विश्वास दिखाते हुए जुलाई 2023 तक उसे कुल ₹16,00,000 का भुगतान कर दिया। भुगतान के बदले ठेकेदार ने स्टाम्प पेपर पर पावती भी दी थी और आश्वासन दिया था कि काम पूरा होने के बाद ही वह शेष राशि लेगा।

हालांकि, बड़ी रकम हाथ में आने के बाद ठेकेदार के तेवर बदल गए। उसने न केवल निर्माण कार्य बीच में ही रोक दिया, बल्कि साइट पर आना और पीड़ितों के फोन उठाना भी बंद कर दिया। जब इंजीनियर के माध्यम से अधूरे काम का मूल्यांकन कराया गया, तो सामने आया कि ठेकेदार ने केवल ‘लिंटर लेवल’ तक का काम किया था, जिसकी वास्तविक लागत महज ₹5.46 लाख के करीब थी। यानी ठेकेदार ने काम के मुकाबले लगभग ₹10 लाख से ज्यादा की अतिरिक्त राशि डकार ली थी।

पीड़ितों द्वारा कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद जब ठेकेदार ने कोई जवाब नहीं दिया, तो मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुँचा। आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों ने पाया कि ठेकेदार प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित रहा और उसने अपनी तरफ से कोई पक्ष नहीं रखा।

आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मकान को अब अधूरा छोड़ना न्यायोचित नहीं है, इसलिए ठेकेदार को आदेश दिया गया कि वह दोनों परिवादियों को ₹3,00,000-₹3,00,000 (कुल ₹6 लाख) की अतिरिक्त राशि 45 दिनों के भीतर वापस करे। साथ ही, इस राशि पर 2 जनवरी 2024 से भुगतान की तिथि तक 9% वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। इसके अतिरिक्त, ठेकेदार को दोनों भाइयों को मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹25,000-₹25,000 और वाद व्यय के रूप में ₹5,000 का अलग से भुगतान करना होगा।

Case Reference : Laxman Shrivas & Anr. Vs. Laxman Sahu

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