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January 23, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सेवा में कमी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक वेल्डिंग कारीगर को ग्राहक से एडवांस पैसे लेकर काम न करना भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्षी पक्षकार को आदेश दिया है कि वह न केवल ग्राहक की पूरी राशि लौटाए, बल्कि उस पर ब्याज और मानसिक क्षतिपूर्ति का हर्जाना भी भरे ।
यह पूरा मामला राजकिशोर नगर निवासी अनुराग अग्रवाल से जुड़ा है । अनुराग ने अपने घर के लिए लोहे का गेट बनवाने हेतु उसलापुर स्थित एकदंता कॉलोनी के प्रकाश विश्वकर्मा से संपर्क किया था । दोनों के बीच गेट बनाने और लगाने का कुल सौदा 25,000 रुपये में तय हुआ था । इसके बाद अनुराग ने 16 फरवरी 2025 को 20,000 रुपये नकद अग्रिम (एडवांस) के तौर पर दिए, जिसकी पावती उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त हुई ।
कारीगर प्रकाश विश्वकर्मा ने भरोसा दिलाया था कि गेट एक सप्ताह के भीतर तैयार होकर लग जाएगा । हालांकि, समय बीतने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ और वह अलग-अलग बहानों से समय टालता रहा । इस दौरान उसने पारिवारिक कारणों का हवाला देकर और पैसों की मांग की, जिस पर अनुराग ने 13 मार्च 2025 को ऑनलाइन माध्यम से 1,500 रुपये और भेज दिए । कुल 21,500 रुपये लेने के बावजूद जब महीनों तक गेट नहीं लगा, तो अनुराग ने कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन विपक्षी ने उसका भी कोई जवाब नहीं दिया ।
अंततः यह मामला जिला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। सुनवाई के दौरान विपक्षी पक्षकार आयोग के समक्ष भी उपस्थित नहीं हुआ, जिसके कारण मामले की कार्यवाही एकपक्षीय रूप से पूरी की गई । आयोग की सदस्य श्रीमती पूर्णिमा सिंह द्वारा पारित आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि अग्रिम राशि लेने के बाद भी सेवा प्रदान न करना सीधे तौर पर ‘सेवा में कमी’ के अंतर्गत आता है ।
आयोग ने अपने फैसले में प्रकाश विश्वकर्मा को निर्देशित किया है कि वह आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर अनुराग अग्रवाल को उनकी मूल राशि 21,500 रुपये लौटाएं । इसके साथ ही, परिवाद पेश करने की तिथि 17 सितंबर 2025 से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा । आयोग ने मानसिक प्रताड़ना और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये का अतिरिक्त हर्जाना भी विपक्षी पर लगाया है ।
Case Reference : Anurag Agrawal Vs. Prakash Vishvakarma