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February 4, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा दावों को तकनीकी आधार पर खारिज करने वाली कंपनियों को कड़ा संदेश दिया है। आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह एक उपभोक्ता के इलाज के खर्च का पूरा भुगतान करे, जिसे कंपनी ने केवल इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि दस्तावेज जमा करने में मामूली देरी हुई थी।
मामला नजर लाल पारा, सिरगिट्टी निवासी रूप सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने स्टार हेल्थ की ‘कॉम्प्रिहेंसिव ऑप्टिमा पॉलिसी’ ली थी। अप्रैल 2023 में अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनके दिल का इलाज (स्टंट प्रॉब्लम) हुआ। इस इलाज पर कुल 2,65,432 रुपये खर्च हुए। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब रूप सिंह ने बीमा राशि की मांग की, तो कंपनी ने यह कहते हुए दावा निरस्त कर दिया कि उन्होंने डिस्चार्ज होने के 15 दिनों के भीतर दस्तावेज पेश नहीं किए।
सुनवाई के दौरान उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों ने बीमा कंपनी के इस तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि दावा पेश करने की समय-सीमा एक प्रक्रियात्मक नियम है, न कि कोई मौलिक शर्त। कोर्ट ने आईआरडीए (IRDA) के 2011 के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि जब तक दावे की सत्यता पर कोई संदेह न हो, तब तक केवल तकनीकी आधार पर या देरी के कारण किसी के वैध हक को नहीं छीना जा सकता।
अदालत ने माना कि गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीज और उसके परिवार की प्राथमिकता इलाज कराना होती है, न कि कागजी कार्रवाई। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह रूप सिंह को उनके इलाज की पूरी राशि 2,65,432 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके साथ ही, मानसिक प्रताड़ना के लिए 10,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया है।
Case Reference : Roop Singh Vs. Star Health and Allied Ins. Co. Ltd. & Anr.