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February 4, 2026 : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम खारिज करने के मनमाने रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह एक महिला उपभोक्ता को ₹6,51,481 की चिकित्सा राशि, 9% ब्याज और मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना अदा करे।
यह मामला सरकंडा निवासी श्रीमती संगीता शुक्ला से जुड़ा है, जिन्होंने स्टार हेल्थ की ‘कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी’ ली थी। सितंबर 2023 में पेट दर्द और बुखार की शिकायत के बाद उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उनके बाएं गुर्दे (Left Kidney) में सिस्ट के ऑपरेशन की सलाह दी गई। जब उन्होंने बीमा कंपनी से कैशलेस इलाज की मांग की, तो कंपनी ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह एक ‘पहले से मौजूद बीमारी’ (Pre-existing disease) है।
बीमा कंपनी का तर्क था कि महिला ने 1986 में अपने दाएं गुर्दे की सर्जरी और थायराइड की जानकारी छिपाई थी। हालांकि, आयोग ने पाया कि 35 साल पहले हुई सर्जरी का वर्तमान बीमारी से कोई लेना-देना नहीं था। इसके अलावा, आईआरडीएआई (IRDAI) के नियमों के अनुसार, केवल वही बीमारियां ‘प्री-एग्जिस्टिंग’ मानी जाती हैं जो पॉलिसी लेने से 48 महीने पहले के भीतर हुई हों।
आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी ने बिना दिमाग लगाए और मनमाने ढंग से क्लेम रिजेक्ट किया था। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह शिकायत दर्ज करने की तारीख से भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज के साथ मेडिकल खर्च का भुगतान करे। साथ ही, मानसिक परेशानी के लिए ₹15,000 और वाद व्यय के रूप में ₹5,000 अतिरिक्त देने का आदेश दिया है।
Case Reference : Smt. Sangeeta Shukla Vs. Star Health and Allied Ins. Co. Ltd. & Ors