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पोस्ट ऑफिस एजेंट ने बुजुर्ग दंपत्ति के खाते से उड़ाए 5.50 लाख, उपभोक्ता फोरम ने डाक विभाग पर लगाया भारी जुर्माना

January 13, 2026 : जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बिलासपुर ने बैंकिंग धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले में डाक विभाग और एक एजेंट के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने सेवा में भारी कमी और नियमों की अनदेखी के चलते डाक विभाग को पीड़ित परिवार को ब्याज सहित पूरी राशि और मानसिक क्षतिपूर्ति भुगतान करने का आदेश दिया है।

यह मामला श्रीमती भवानी सिन्हा और उनके पति मुरारी मोहन सिन्हा से जुड़ा है, जिनका बचत खाता झारखंड के हजारीबाग पोस्ट ऑफिस में था। शारीरिक अस्वस्थता के कारण यह दंपत्ति बिलासपुर में अपने पुत्र के पास रहने आए थे। वहां उन्होंने राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC) लेने के लिए पोस्ट ऑफिस एजेंट संजय नारंग से संपर्क किया और उसे विश्वास में लेकर कुछ निकासी फॉर्म और आवेदन पर हस्ताक्षर कर दिए।

एजेंट संजय नारंग ने इस भरोसे का फायदा उठाते हुए धोखाधड़ी की साजिश रची। उसने 17 मई 2019 से 13 जून 2019 के बीच कुल 22 बार में 25,000-25,000 रुपये करके कुल 5,50,000 रुपये अवैध रूप से निकाल लिए। जांच में सामने आया कि यह निकासी बिलासपुर के SECL पोस्ट ऑफिस से की गई थी। जब दंपत्ति के पुत्र ने खाते की जांच करवाई, तब इस बड़े गबन का खुलासा हुआ।

आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि पोस्ट ऑफिस के अधिकारियों ने बैंकिंग नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाईं। पोस्ट ऑफिस सेविंग बैंक मैनुअल के अनुसार, कोई भी एजेंट किसी खाताधारक के लिए ‘मैसेंजर’ बनकर पैसे नहीं निकाल सकता, फिर भी विभाग ने संजय नारंग को भुगतान किया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई निकासी फॉर्म पर हस्ताक्षर का मिलान नहीं होने के बावजूद (SS Differ), डाकघर ने बिना किसी वेरिफिकेशन के भुगतान जारी रखा।

आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह केवल एजेंट की धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि इसमें पोस्ट ऑफिस के कर्मचारियों की भी मिलीभगत और लापरवाही नजर आती है। उपभोक्ता फोरम ने आदेश दिया है कि विपक्षी पक्ष (अधीक्षक डाकघर बिलासपुर, पोस्ट मास्टर SECL और एजेंट संजय नारंग) संयुक्त रूप से शिकायतकर्ताओं को 5,50,000 रुपये वापस करेंगे। साथ ही, इस राशि पर दिसंबर 2020 से भुगतान की तारीख तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। इसके अतिरिक्त, बुजुर्ग दंपत्ति को हुए मानसिक कष्ट के लिए 25,000 रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये अलग से देने का निर्देश दिया गया है।

Case Reference : Smt. Bhawani Sinha &Anr. Vs. Suptd. Post Office Bilaspur & Ors.

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