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News Citation : 2026 LN (CG-RERA) 32
May 11, 2026 : छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने एक महत्वपूर्ण आदेश में रजिस्टर्ड रियल एस्टेट एजेंट के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। मामला दुर्ग जिले की “आशीर्वाद अपार्टमेंट” परियोजना में फ्लैट बिक्री विवाद से जुड़ा है, जिसमें एक खरीदार ने फ्लैट का कब्जा या जमा राशि वापसी की मांग की थी। हालांकि, प्राधिकरण ने खरीदार की मुख्य शिकायत खारिज कर दी, लेकिन यह माना कि रियल एस्टेट एजेंट ने कथित तौर पर बिना वैध अधिकार के खरीदार से धनराशि प्राप्त की।
यह मामला नासिर अहमद कुरैशी द्वारा दायर शिकायत से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने मेसर्स स्वरज बिल्डकॉन और परियोजना प्रमोटर मेसर्स आर.एन. रियल्टी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। “आशीर्वाद अपार्टमेंट” परियोजना छत्तीसगढ़ रेरा में पंजीकृत है और इसका रेरा पंजीकरण क्रमांक PCGRERA151018000801 है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 30 नवंबर 2023 को फ्लैट नंबर C-201 की खरीद के लिए एक समझौता किया गया था। फ्लैट की कुल कीमत 32.51 लाख रुपये तय हुई थी। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसने 15.51 लाख रुपये का भुगतान किया, जिसमें 10 लाख रुपये और 5 लाख रुपये RTGS के माध्यम से तथा 51 हजार रुपये नकद दिए गए। समझौते के अनुसार 18 महीने के भीतर फ्लैट का पंजीयन और कब्जा दिया जाना था।
शिकायत में कहा गया कि बार-बार अनुरोध और 19 अगस्त 2025 को कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद न तो बिक्री विलेख निष्पादित किया गया और न ही कब्जा दिया गया। इसके बाद खरीदार ने रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 31 के तहत प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया और फ्लैट का कब्जा या ब्याज सहित भुगतान वापसी की मांग की।
दूसरी ओर, परियोजना प्रमोटर ने अपने जवाब में पूरे दावे से इनकार किया। प्रमोटर का कहना था कि कथित समझौता केवल शिकायतकर्ता और रियल एस्टेट एजेंट के बीच हुआ था तथा प्रमोटर उसका पक्षकार नहीं था। प्रमोटर ने यह भी कहा कि उसे शिकायतकर्ता से कोई धनराशि प्राप्त नहीं हुई और एजेंट को पैसे लेने का कोई अधिकार नहीं दिया गया था।
प्रमोटर ने यह भी तर्क दिया कि कथित बिक्री समझौता न तो पंजीकृत था और न ही विधिवत प्रमाणित। इसलिए उसकी वैधता और प्रामाणिकता संदेहास्पद है। जवाब में यह आरोप भी लगाया गया कि शिकायतकर्ता और एजेंट के बीच मिलीभगत हो सकती है तथा प्रमोटर को झूठा फंसाने का प्रयास किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान रेरा की पीठ, जिसमें अध्यक्ष संजय शुक्ला और सदस्य धनंजय देवांगन शामिल थे, ने अधिकार क्षेत्र, समय सीमा और राहत की पात्रता जैसे प्रश्न तय किए। प्राधिकरण ने माना कि चूंकि विवाद एक पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजना से जुड़ा है, इसलिए रेरा को मामले की सुनवाई का अधिकार है। साथ ही यह भी कहा गया कि शिकायत समयसीमा से बाहर नहीं है क्योंकि बिक्री विलेख निष्पादित न होना और कब्जा न मिलना एक निरंतर कारण बना हुआ है।
हालांकि, राहत के प्रश्न पर प्राधिकरण ने पाया कि शिकायतकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि परियोजना प्रमोटर ने एजेंट को धनराशि लेने का अधिकार दिया था। आदेश में उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता ने स्वयं स्वीकार किया कि भुगतान एजेंट को किया गया था, प्रमोटर को नहीं। साथ ही ऐसा कोई दस्तावेज रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि एजेंट प्रमोटर की ओर से अधिकृत था।
रेरा ने स्पष्ट कहा कि चूंकि प्रमोटर को कोई भुगतान प्राप्त नहीं हुआ, इसलिए उसके खिलाफ फ्लैट का कब्जा देने या बिक्री विलेख निष्पादित करने का आदेश पारित नहीं किया जा सकता। इसी कारण राशि वापसी का आदेश भी प्रमोटर के खिलाफ नहीं दिया जा सकता।
इसके बावजूद प्राधिकरण ने रियल एस्टेट एजेंट की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी की। आदेश में कहा गया कि एजेंट ने बिना वैध अधिकार के खरीदार से धनराशि प्राप्त की, जो रेरा अधिनियम की धारा 10(ग)(अ) और 10(ग)(ई) का उल्लंघन प्रतीत होता है। ये प्रावधान पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों के कर्तव्यों और दायित्वों से संबंधित हैं।
प्राधिकरण ने छत्तीसगढ़ रेरा के रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि एजेंट आशुतोष परमार के खिलाफ रेरा अधिनियम की धारा 62 के तहत अलग से कार्रवाई शुरू की जाए। धारा 62 के तहत रियल एस्टेट एजेंट द्वारा अधिनियम या नियमों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है।
यह आदेश रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि केवल रेरा पंजीकृत परियोजना होने से हर निजी लेनदेन स्वतः प्रमोटर पर बाध्यकारी नहीं हो जाता। यदि खरीदार किसी एजेंट को भुगतान करता है, तो उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि एजेंट प्रमोटर की ओर से अधिकृत है। अन्यथा विवाद की स्थिति में प्रमोटर के खिलाफ राहत प्राप्त करना कठिन हो सकता है।
रेरा का यह आदेश रियल एस्टेट एजेंटों की जवाबदेही को भी मजबूत करता है। प्राधिकरण ने संकेत दिया कि यदि कोई एजेंट बिना अधिकार के धनराशि स्वीकार करता है, तो उसके खिलाफ नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है, भले ही खरीदार को मुख्य राहत न मिले।
अंततः रेरा ने खरीदार की शिकायत खारिज कर दी, लेकिन एजेंट के खिलाफ अलग कार्रवाई का रास्ता खोल दिया, जो भविष्य में रियल एस्टेट लेनदेन में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए अहम माना जा रहा है।
Case Reference : M-ALL-2025-03209 (PCGRERA151018000801)