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April 20, 2026 : केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से जुड़े एक आरटीआई मामले में CPIO के शुरुआती जवाब को गलत ठहराते हुए उसे भविष्य में तथ्यात्मक और सटीक जानकारी देने की सलाह दी है। हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में किसी प्रकार की दुर्भावना (mala fide) नहीं पाई गई, इसलिए आगे कोई दंडात्मक कार्रवाई आवश्यक नहीं है।
यह मामला झारखंड के बोकारो निवासी राकेश कुमार द्वारा दायर आरटीआई आवेदन से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने CBI में असिस्टेंट प्रोग्रामर भर्ती (विज्ञापन संख्या 12/2024) की स्थिति से संबंधित जानकारी मांगी थी। उन्होंने विशेष रूप से एससी श्रेणी के आवेदकों की संख्या, लिखित परीक्षा की संभावना और तैयारी के लिए समयावधि जैसे प्रश्न उठाए थे।
CPIO ने 21 जनवरी 2025 को जवाब देते हुए कहा था कि भर्ती प्रक्रिया जारी होने के कारण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती, जबकि कुछ प्रश्नों को आरटीआई अधिनियम की धारा 2(फ) के दायरे से बाहर बताया गया।
बाद में सुनवाई के दौरान CPIO ने संशोधित जानकारी प्रस्तुत की, जिसमें बताया गया कि असिस्टेंट प्रोग्रामर पद के लिए कुल 2003 एससी उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, जिनमें 22 PwBD उम्मीदवार शामिल हैं। हालांकि अन्य प्रश्नों को काल्पनिक बताते हुए जानकारी देने से इंकार किया गया।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बिंदु संख्या 1 पर दी गई जानकारी पर्याप्त है और शेष प्रश्न आरटीआई अधिनियम की धारा 2(फ) के तहत सूचना की श्रेणी में नहीं आते। लेकिन आयोग ने यह भी पाया कि CPIO का प्रारंभिक जवाब गलत आधार पर दिया गया था, क्योंकि सूचना देने से इनकार ‘प्रक्रिया जारी है’ कहकर किया गया, जबकि उचित कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया जाना चाहिए था।
अंततः आयोग ने मामले का निस्तारण करते हुए CPIO को भविष्य में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सटीक और तथ्यात्मक जवाब देने की सलाह दी।
Case Reference : Rakesh Kumar, Complainant vs. CPIO, Union Public Service Commission, New Delhi