मुंगेली : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मुंगेली के बालानी चौक में धार्मिक मूर्ति स्थापना के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि मूर्ति स्थापना से किसी सरकारी नियम या वैधानिक प्रावधान का उल्लंघन हो रहा है।
यह मामला न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष था। कुछ स्थानीय दुकानदारों ने नगर पालिका परिषद के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसके तहत देवी मां परमेश्वरी की मूर्ति स्थापित की जानी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह याचिका तीसरी बार दायर की गई थी, लेकिन पहले बताई गई कमियों को दूर नहीं किया गया। केवल 4 अप्रैल 2025 के कार्यादेश को चुनौती दी गई, जबकि तकनीकी स्वीकृति, निविदा सूचना और नगर परिषद के मूल प्रस्ताव को चुनौती नहीं दी गई। पीठ ने कहा कि मूल आदेश को चुनौती दिए बिना केवल परिणामी आदेश को चुनौती देना विधिसम्मत नहीं है।
दुकानदारों ने दलील दी थी कि संकरे और व्यस्त चौक में मूर्ति स्थापना से यातायात बाधित होगा और उनके व्यापार पर असर पड़ेगा। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 19(1)(g) के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि अदालत ने पाया कि यातायात बाधा संबंधी दावा केवल अनुमान पर आधारित है। न तो कोई ट्रैफिक रिपोर्ट पेश की गई और न ही कोई ठोस दस्तावेज।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला दिया, लेकिन राज्य ने कहा कि वे मामले अवैध अतिक्रमण से जुड़े थे, जबकि यहां निर्णय एक सक्षम नगर निकाय ने अपने वैधानिक अधिकारों के तहत लिया है।
अंत में हाई कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित है। जब तक मनमानी, वैधानिक उल्लंघन या संवैधानिक अधिकारों का स्पष्ट हनन साबित न हो, अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी।

