बिलासपुर : गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के यूजीसी मानवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (एमएमटीटीसी) में कार्यरत पांच अधिकारी-कर्मचारी इन दिनों असमंजस की स्थिति में हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उनकी नियमित नियुक्ति को संविदा में बदलने का निर्णय लिए जाने के बाद पिछले दो महीनों से उनका वेतन भी अटका हुआ है।
एमएमटीटीसी में कार्यरत टेक्निकल ऑफिसर और सेक्शन ऑफिसर सहित कुल पांच कर्मचारियों की सेवा शर्तों में परिवर्तन करने का निर्णय विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिया है। इसके बाद से इन कर्मचारियों का वेतन भुगतान रुक गया है, क्योंकि यूजीसी ने इनके वेतन के लिए राशि जारी करने से इनकार कर दिया है।
बताया जा रहा है कि यूजीसी मानवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर (एमएमटीटीसी) को पहले एचआरडीसी और उससे पहले एकेडमिक स्टाफ कॉलेज के नाम से जाना जाता था। यह एक शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र है, जहां शिक्षकों के लिए ओरिएंटेशन कोर्स, रिफ्रेशर कोर्स और अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
इस प्रशिक्षण केंद्र में नियुक्तियों के संबंध में यूजीसी से पत्र मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जनवरी माह में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक बुलाई थी, जिसमें इस विषय पर चर्चा की गई। इसके बाद यह मामला एकेडमिक काउंसिल और एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठकों में भी रखा गया।
बैठकों में एमएमटीटीसी के अंतर्गत कार्यरत विभिन्न गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति शर्तों में बदलाव करने की संस्तुति की गई। इसके तहत नियमित नियुक्ति को कार्यकालिक संविदा नियुक्ति में परिवर्तित करने का निर्णय लिया गया। यूजीसी ने भी एमएमटीटीसी में आवश्यकता अनुसार सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति संविदा आधार पर करने की बात कही है।
इस निर्णय के बाद एमएमटीटीसी में कार्यरत पांच अधिकारी-कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। वे न तो पूरी तरह नियमित कर्मचारी रह गए हैं और न ही संविदा नियुक्ति की स्थिति स्पष्ट है। इसी कारण पिछले दो महीनों से उनका वेतन भी लंबित है।
नियमित नियुक्ति को संविदा में बदलने का यह निर्णय कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार चक्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित बैठकों में लिया गया।

