1
1
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
February 13, 2026 : बिलासपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बिल्डर की मनमानी पर लगाम कसते हुए पीड़िता को बड़ी राहत दी है। आयोग ने सेवा में कमी और धोखाधड़ी के मामले में विपक्षी पक्ष को पूरी भुगतान राशि ब्याज सहित वापस करने और मानसिक क्षतिपूर्ति देने का कड़ा आदेश सुनाया है।
यह मामला साल 2016 में शुरू हुआ था जब दयालबंद निवासी श्रीमती सोमा रॉय ने ग्राम तोरवा स्थित ‘मातृनिवास’ अपार्टमेंट के प्रथम तल पर एक फ्लैट खरीदने का सौदा श्रीमती रीता दास से 20 लाख रुपये में किया था। अनुबंध के मुताबिक, विपक्षी पक्ष को 24 महीने के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर कब्जा सौंपना था। सोमा रॉय ने निर्धारित समय सीमा के भीतर ही किश्तों में कुल 16,50,000 रुपये का भुगतान कर दिया।
हालांकि, वर्षों बीत जाने के बाद भी जब निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ और फ्लैट का कब्जा नहीं मिला, तो सोमा रॉय ने कानूनी रास्ता अपनाया। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विपक्षी पक्ष ने पारिवारिक और आर्थिक तंगी का हवाला देकर न तो घर बनाया और न ही पैसे वापस किए। यहाँ तक कि भुगतान के एवज में दिए गए चेक भी बैंक में अनादरित (बाउंस) हो गए। पुलिस जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर विपक्षी के खिलाफ धारा 420 के तहत मामला भी दर्ज किया गया था।
आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल और सदस्यों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि विपक्षी पक्ष ने स्पष्ट रूप से सेवा में कमी की है। अपने फैसले में आयोग ने श्रीमती रीता दास को आदेश दिया कि वह आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर सोमा रॉय को उनके द्वारा भुगतान किए गए 16,50,000 रुपये वापस करें। इसके साथ ही, जनवरी 2017 से भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देने का निर्देश दिया गया है।
आयोग ने पीड़िता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 25,000 रुपये का हर्जाना और वाद व्यय के रूप में 5,000 रुपये अलग से देने का आदेश पारित किया है। यह फैसला उन ग्राहकों के लिए एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है जो बिल्डरों द्वारा समय पर कब्जा न दिए जाने की समस्या से जूझ रहे हैं।
Case Reference : Smt. Soma Roy Vs. Smt. Reeta Das