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बलौदाबाजार : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले की कसडोल अदालत ने अवैध महुआ शराब रखने के आरोपी ईश्वर भोई को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्वेता मिश्रा ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।
यह मामला अक्टूबर 2022 का है, जब राजादेवरी पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर ग्राम गिधपुरी में छापेमारी की थी। पुलिस का दावा था कि ईश्वर भोई के घर के आंगन से एक पांच लीटर की प्लास्टिक जरीकेन में करीब चार लीटर कच्ची महुआ शराब बरामद की गई थी, जिसकी कीमत लगभग 800 रुपये आंकी गई थी। इस जब्ती के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि इस केस की नींव काफी कमजोर थी। मामले के दो महत्वपूर्ण स्वतंत्र गवाहों, अजय सोरी और पवन ठाकुर ने अदालत में अपने बयानों से पलटते हुए अभियोजन का साथ नहीं दिया। इन गवाहों ने न्यायाधीश के सामने स्वीकार किया कि पुलिस ने आरोपी से उनके सामने कुछ भी जब्त नहीं किया था और उन्होंने केवल पुलिस के कहने पर दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। इसके अतिरिक्त, मामले के मुख्य विवेचक नारायण अवस्थी भी लकवाग्रस्त होने और बोलने में असमर्थ होने के कारण अदालत में गवाही देने नहीं पहुंच सके, जिससे पुलिस की जांच प्रक्रिया साबित नहीं हो पाई।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि स्वतंत्र गवाहों के मुकरने और विवेचक की अनुपस्थिति के कारण मामले में संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है। न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए अदालत ने आरोपी ईश्वर भोई को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए दोषमुक्त घोषित कर दिया। साथ ही, न्यायालय ने जब्त की गई शराब को मूल्यहीन मानते हुए उसे नष्ट करने का आदेश भी जारी किया है।