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दहेज प्रताड़ना मामले में साक्ष्यों के अभाव में पति दोषमुक्त: कसडोल न्यायालय का बड़ा फैसला

बलौदाबाजार-भाटापारा: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल न्यायालय ने दहेज प्रताड़ना और क्रूरता के एक गंभीर मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, श्वेता मिश्रा की अदालत ने आरोपी मोहन उर्फ दूधनाथ टंडन को उसके विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य न मिलने और पीड़िता के बयानों में विरोधाभास के चलते सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है।

यह मामला साल 2019 का है, जब प्रार्थिया भारती टंडन ने थाना कसडोल में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी शादी सामाजिक रीति-रिवाज के साथ मोहन टंडन से हुई थी। भारती का आरोप था कि शादी के पहले ही दिन से उसके पति ने दहेज में मोटरसाइकिल और टीवी की मांग को लेकर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, 16 जुलाई 2019 को आरोपी ने उसके साथ गंभीर मारपीट की थी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और आरोपी के खिलाफ भा.दं.सं. की धारा 498-ए और 323 के तहत मामला दर्ज किया गया।

सुनवाई के दौरान एक नया मोड़ तब आया जब यह तथ्य सामने आया कि धारा 323 (साधारण मारपीट) के तहत दोनों पक्षों के बीच पहले ही राजीनामा हो चुका था, जिसके आधार पर आरोपी को उस धारा से पहले ही बरी किया जा चुका था। शेष बची धारा 498-ए (दहेज प्रताड़ना) पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पाया कि मुख्य गवाह और स्वयं प्रार्थिया भारती टंडन ने अपने बयानों में काफी विरोधाभास व्यक्त किया है। पुनः प्रतिपरीक्षण के दौरान प्रार्थिया ने अपने पहले के कई आरोपों को अस्वीकार कर दिया और यह भी स्वीकार किया कि वह अपनी मर्जी के खिलाफ इस शादी में शामिल हुई थी।

अदालत ने अपने निष्कर्ष में स्पष्ट किया कि जब स्वयं मुख्य गवाह यानी प्रार्थिया ही अभियोजन पक्ष का पूरी तरह समर्थन नहीं कर रही है और उसके बयानों में निरंतरता नहीं है, तो आरोपी को सजा देना न्यायसंगत नहीं होगा। संदेह का लाभ देते हुए न्यायालय ने मोहन टंडन को ‘दोषमुक्त’ कर दिया और उनके पुराने जमानत बांड भी निरस्त कर दिए। इस फैसले के साथ ही करीब सात साल से चल रहे इस कानूनी विवाद का अंत हो गया है।