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News Citation : 2026 LN (CG-RERA) 31
May 11, 2026 : प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवंटित फ्लैट का वर्षों तक कब्जा नहीं मिलने पर छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ने एक महिला आवंटी को बड़ी राहत दी है। प्राधिकरण ने छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल को निर्देश दिया है कि वह देरी से कब्जा देने के कारण आवंटी को लगभग 2.98 लाख रुपये ब्याज सहित क्षतिपूर्ति के रूप में भुगतान करे। रेरा ने माना कि आवंटी से पूरी राशि लेने के बावजूद निर्धारित समय सीमा के भीतर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया, जो रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के तहत स्पष्ट उल्लंघन है।
मामला रायपुर निवासी पूजा टुटेजा द्वारा छत्तीसगढ़ रेरा के समक्ष दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में कहा गया कि उन्होंने वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नया रायपुर के सेक्टर-16 स्थित एलआईजी फ्लैट के लिए आवेदन किया था। 8 अप्रैल 2016 को पंजीयन के बाद उन्होंने 30 हजार रुपये जमा किए और 25 जून 2016 को उन्हें फ्लैट नंबर BS-75/609 आवंटित किया गया। यह परियोजना “प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री आवास योजना” नाम से पंजीकृत थी, जिसका रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर PCGRERA070718000487 है।
फ्लैट की कुल कीमत 9.50 लाख रुपये तय की गई थी। इसमें से 1 लाख रुपये की सब्सिडी राज्य सरकार की योजना के तहत दी जानी थी, जबकि शेष 8.50 लाख रुपये बैंक ऋण और किश्तों के माध्यम से जमा किए गए। आवंटी ने इंडियन ओवरसीज बैंक से ऋण लिया और दावा किया कि उन्होंने समय पर सभी भुगतान कर दिए थे। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2018 में उन्हें आंशिक सब्सिडी राशि भी प्राप्त हुई, लेकिन इसके बावजूद आज तक फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया।
शिकायतकर्ता ने रेरा से मांग की कि उन्हें आवंटित फ्लैट का कब्जा दिलाया जाए, शेष सब्सिडी राशि जारी की जाए और देरी के लिए ब्याज सहित मुआवजा दिया जाए। उनका कहना था कि आवंटन शर्तों के अनुसार निर्माण कार्य साढ़े तीन वर्षों में पूरा कर कब्जा सौंपा जाना था, लेकिन गृह निर्माण मंडल ऐसा करने में विफल रहा।
दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल ने शिकायत का विरोध करते हुए कहा कि यह मामला रेरा के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि इसी विवाद को लेकर शिकायतकर्ता पहले ही वर्ष 2022 में स्थायी लोक अदालत, रायपुर में आवेदन दायर कर चुकी थीं। मंडल ने तर्क दिया कि एक ही विवाद पर दो अलग-अलग मंचों पर समान राहत नहीं मांगी जा सकती। इसके अलावा मंडल ने यह भी कहा कि शिकायत समय सीमा से बाहर है तथा आवंटी को सेक्टर-16 के ब्लॉक-32 और 33 में वैकल्पिक फ्लैट का प्रस्ताव वर्ष 2019 और 2022 में दिया गया था, लेकिन उनकी ओर से कोई सहमति नहीं दी गई।
गृह निर्माण मंडल ने यह भी कहा कि सब्सिडी से जुड़ा मामला बैंक और केंद्र सरकार से संबंधित है, इसलिए शेष सब्सिडी राशि के लिए मंडल जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। मंडल के अनुसार शिकायतकर्ता को 20 जून 2018 को 54,906 रुपये की सब्सिडी पहले ही प्राप्त हो चुकी थी।
इस मामले में रेरा ने पहले दिसंबर 2025 में आदेश पारित करते हुए गृह निर्माण मंडल को 45 दिनों के भीतर फ्लैट का कब्जा देने और लगभग 2.83 लाख रुपये ब्याज के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया था। हालांकि इस आदेश को छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट अपीलीय अधिकरण में चुनौती दी गई। अपीलीय अधिकरण ने फरवरी 2026 में रेरा का आदेश निरस्त करते हुए मामले को पुनः सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। अधिकरण ने कहा, “मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए पुनः परीक्षण आवश्यक है।”
मामले की दोबारा सुनवाई के दौरान रेरा ने सबसे पहले यह तय किया कि क्या स्थायी लोक अदालत में लंबित प्रकरण के बावजूद उसके पास सुनवाई का अधिकार है। प्राधिकरण ने पाया कि शिकायतकर्ता ने अगस्त 2022 में सबसे पहले रेरा के समक्ष ऑनलाइन शिकायत दायर की थी और कार्रवाई नहीं होने पर बाद में लोक अदालत का रुख किया था। रेरा ने यह भी नोट किया कि शिकायतकर्ता लोक अदालत से प्रकरण वापस लेने के लिए आवेदन कर चुकी हैं। प्राधिकरण ने रेरा अधिनियम की धारा 79 का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सिविल न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र पर रोक है और इसलिए रेरा को मामले की सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।
रेरा ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2016 में आवंटन के बाद अक्टूबर 2019 तक कब्जा दिया जाना चाहिए था, लेकिन आवंटी को अब तक फ्लैट नहीं मिला। प्राधिकरण ने माना कि शिकायतकर्ता ने पूरी राशि जमा कर दी थी, इसलिए उन्हें रेरा अधिनियम की धारा 18 और नियम 17 के तहत देरी के लिए ब्याज और मुआवजे का अधिकार प्राप्त है।
हालांकि रेरा ने यह भी माना कि आवंटन समझौता रेरा कानून के पूर्ण प्रभाव में आने से पहले का था और उसमें फ्लैट का स्थान बदलने का प्रावधान मौजूद था। साथ ही प्राधिकरण ने यह भी देखा कि शिकायतकर्ता ने वर्ष 2022 में कानूनी कार्रवाई शुरू की, जबकि कब्जा वर्ष 2019 में मिल जाना चाहिए था। इसी आधार पर रेरा ने ब्याज की अवधि अक्टूबर 2019 से दिसंबर 2022 तक सीमित कर दी।
11 मई 2026 को पारित अंतिम आदेश में छत्तीसगढ़ रेरा ने गृह निर्माण मंडल को निर्देश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को 2,98,350 रुपये ब्याज के रूप में अदा करे। यह राशि 8.50 लाख रुपये पर 39 महीनों की अवधि के लिए 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से गणना की गई, जो भारतीय स्टेट बैंक की मार्जिनल लेंडिंग रेट में 2 प्रतिशत जोड़कर तय की गई।
रेरा ने साथ ही शिकायतकर्ता को यह निर्देश भी दिया कि वर्ष 2018 में प्राप्त 54,906 रुपये की सब्सिडी राशि 45 दिनों के भीतर सरकारी कोष में वापस जमा करें, क्योंकि परियोजना की परिस्थितियों के कारण वह राशि शासन को वापस किए जाने योग्य हो गई है।
यह फैसला प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य सरकारी आवास योजनाओं के तहत फ्लैट बुक करने वाले हजारों घर खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आदेश से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी आवास परियोजनाओं में भी डेवलपर या आवास मंडल रेरा कानून के तहत जवाबदेह हैं और समय पर कब्जा नहीं देने पर उन्हें ब्याज सहित क्षतिपूर्ति देनी पड़ सकती है। यह फैसला उन मामलों में भी महत्वपूर्ण है जहां समान विवाद लोक अदालत या अन्य मंचों पर लंबित होने के बावजूद रेरा के अधिकार क्षेत्र का प्रश्न उठता है।
Case No. : M-PRO-2025-02890 (PCGRERA070718000487)