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राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने संगम कोल्ड स्टोरेज का फायर बीमा दावा खारिज किया, कहा आग लगने का ठोस सबूत नहीं मिला।

May 5, 2026 : राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (NCDRC) ने उत्तर प्रदेश स्थित संगम कोल्ड स्टोरेज एंड आइस प्लांट द्वारा न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ दायर बीमा दावा खारिज कर दिया है। आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में विफल रहा कि कोल्ड स्टोरेज में आलू के स्टॉक, मशीनरी और भवन को हुआ नुकसान वास्तव में ऐसी आग से हुआ था, जो बीमा पॉलिसी के दायरे में आती हो। आयोग ने माना कि परिसर में विद्युत शॉर्ट सर्किट की घटना संभव हो सकती है, जिससे कूलिंग सिस्टम प्रभावित हुआ और आलू खराब हुए, लेकिन बड़े पैमाने पर आग लगने का कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है।

यह मामला उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित संगम कोल्ड स्टोरेज एंड आइस प्लांट में 9 जुलाई 2008 को कथित आग लगने की घटना से जुड़ा था। शिकायतकर्ता के अनुसार, न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से लगभग 3.22 करोड़ रुपये की दो अग्नि बीमा पॉलिसियां ली गई थीं। दावा किया गया कि शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी, जिससे कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू, मशीनरी और भवन को भारी नुकसान पहुंचा।

शिकायतकर्ता ने कहा कि आग लगने के बाद कर्मचारियों ने मौके पर लगे अग्निशमन उपकरणों की मदद से आग पर काबू पाया। बाद में फायर विभाग की एक रिपोर्ट में भी आग लगने और शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण बताया गया था। शिकायतकर्ता ने इस रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनी से नुकसान की भरपाई की मांग की।

बीमा कंपनी ने दावे को संदेहास्पद बताते हुए सर्वेयर आर.सी. बाजपेयी को जांच के लिए नियुक्त किया। सर्वेयर ने 8 नवंबर 2008 को अपनी रिपोर्ट में कहा कि मौके पर आग लगने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले। रिपोर्ट में कहा गया कि लकड़ी के पट्टे सुरक्षित थे, आलू जले हुए नहीं थे, मशीनरी और अमोनिया टैंक सामान्य स्थिति में थे तथा कहीं भी बड़े पैमाने पर आग बुझाने के प्रयासों के निशान नहीं मिले।

सर्वेयर ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि आलू खराब होने का वास्तविक कारण कोल्ड स्टोरेज में पर्याप्त कूलिंग व्यवस्था और बिजली आपूर्ति का अभाव था। रिपोर्ट के अनुसार, कोल्ड स्टोरेज को आवश्यक लाइसेंस और बिजली कनेक्शन मिलने से पहले ही आलू स्टोर किए जा रहे थे और परिसर में अनधिकृत बिजली व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा था।

मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने सर्वेयर की रिपोर्ट को पूरी तरह गलत और पक्षपातपूर्ण बताया। शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि फायर विभाग की रिपोर्ट, प्रत्यक्षदर्शियों के हलफनामे, बैंक रिकॉर्ड, स्टॉक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेज बीमा कंपनी को दिए गए थे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि बीमा कंपनी ने सर्वे रिपोर्ट और दावा अस्वीकार करने वाला पत्र प्रारंभ में उपलब्ध नहीं कराया और बाद में आयोग के निर्देश पर ही रिकॉर्ड पर रखा गया।

शिकायतकर्ता ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा भेजे गए पत्रों और पुलिस को दी गई सूचनाओं का भी हवाला दिया, जिनमें शॉर्ट सर्किट के कारण नुकसान होने की बात कही गई थी।

दूसरी ओर, बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि यह दावा फर्जी था और वास्तव में मशीनरी फेल होने या कूलिंग सिस्टम खराब होने से हुए नुकसान को “आग से नुकसान” दिखाकर बीमा राशि प्राप्त करने का प्रयास किया गया। कंपनी ने कहा कि यदि इतनी बड़ी आग लगी होती तो लकड़ी के पट्टे, आलू की बोरियां और भवन के हिस्से अवश्य जलते, लेकिन ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला।

एनसीडीआरसी की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति ए.पी. साही और सदस्य भरतकुमार पंड्या शामिल थे, ने कहा कि बीमा दावा स्वीकार करने के लिए शिकायतकर्ता को यह साबित करना आवश्यक था कि वास्तव में “फायर पेरिल” यानी आग की घटना हुई थी। आयोग ने कहा कि रिकॉर्ड से अधिकतम यह संकेत मिलता है कि इलेक्ट्रिकल पैनल में स्पार्क या शॉर्ट सर्किट हुआ होगा, लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि उससे ऐसी आग लगी जिसने भवन, मशीनरी या स्टॉक को भारी नुकसान पहुंचाया।

आयोग ने यह भी कहा कि घटना के दिन फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंची थी और बाद में दी गई फायर रिपोर्ट में भी नुकसान की प्रकृति और सीमा का स्पष्ट विवरण नहीं था। आदेश में कहा गया कि केवल एमसीबी बॉक्स और कुछ तारों के जलने के संकेत मिले, जो संभवतः शॉर्ट सर्किट के कारण थे, लेकिन इससे बड़े स्तर की आग सिद्ध नहीं होती।

महत्वपूर्ण रूप से आयोग ने स्पष्ट किया कि संबंधित बीमा पॉलिसी केवल आग से होने वाले नुकसान को कवर करती थी। मशीनरी ब्रेकडाउन या कूलिंग सिस्टम फेल होने के कारण आलू खराब होने जैसी स्थिति इस पॉलिसी के दायरे में नहीं आती थी। आयोग ने अपने आदेश में कहा, “शिकायतकर्ता को नुकसान किसी अन्य कारण से हुआ हो सकता है, लेकिन यह ऐसा नुकसान नहीं है जो पॉलिसी की शर्तों के तहत ‘आग’ के जोखिम के रूप में कवर हो।”

हालांकि आयोग ने यह माना कि सर्वेयर की रिपोर्ट में कुछ विसंगतियां थीं और उसके सभी दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं लाए गए थे, फिर भी आयोग ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य वास्तविक आग की घटना सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसके चलते आयोग ने शिकायत खारिज करते हुए बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार किए जाने को सही ठहराया।

यह फैसला बीमा विवादों में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को दोहराता है कि केवल शॉर्ट सर्किट या मशीनरी खराबी का दावा पर्याप्त नहीं होता। यदि बीमा पॉलिसी “फायर पेरिल” आधारित है, तो दावेदार को स्पष्ट और ठोस साक्ष्यों के साथ यह साबित करना होगा कि वास्तविक आग लगी थी और उसी के कारण नुकसान हुआ।

Case Reference : NC/CC/23/2009, M/s. Sangam Cold Storage & Ice Plant vs New India Assurance Company Limited & Ors.