• Hindi
  • झण्डा सत्याग्रह 1923: भेलवापानी ले उठिस आजादी के झंडा

    छत्तीसगढ़ की जनजातीय गौरव गाथा (क्रांति) | LawNotify.in Tribal Pride and Revolutionary Legacy of Chhattisgarh

    सन 1923 म शुरू होए झण्डा सत्याग्रह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक अहम कड़ी रहिस। ये आंदोलन महात्मा गांधी जी के अहिंसा अऊ नागरिक अवज्ञा के विचार ले प्रेरित रहिस। छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाका संग-संग घने जंगल अऊ दूरस्थ गांव म बसे जनजातीय समाज म घलो ये आंदोलन के गूंज सुनाई दीस। अंग्रेजी हुकूमत के बढ़त लगान अऊ अन्यायपूर्ण नीतिमन के खिलाफ गांव-गांव म असंतोष बढ़त जात रहिस।

    तत्कालीन कांकेर रियासत म दीवान द्वारा भू-राजस्व बढ़ाए जाए के फैसला ले जनमानस म रोष फैल गीस। जनजाति बहुल गांव भेलवापानी म सुखदेव पातर अऊ ओकर साथी मन खुलके विरोध करे बर आगे आइन। सुखदेव पातर के जनम 1892 म राउरवाही गांव म रघुनाथ हलबा के घर होए रहिस। बाद म परिवार सहित वो मन भेलवापानी आ बस गइन। जवान उमर लेच सुखदेव पातर महात्मा गांधी जी के स्वराज अऊ अहिंसा के विचार ले गहिरा प्रभावित रहिन। इंदरू केंवट, कंगलू कुम्हार अऊ दूसर साथी मन संग मिलके वो मन आजादी के चेतना गांव म फैलावत रहिन।

    सन 1920 म धमतरी के कंडेल गांव म नहर कर के खिलाफ आंदोलन छिड़ गीस। किसान मन “नहर कर” देय ले मना कर दीन। 21 दिसंबर 1920 ला महात्मा गांधी धमतरी पहुंचिन अऊ आंदोलनकारी मन ला संबोधित करिन। भेलवापानी ले सुखदेव पातर अऊ ओकर साथी मन पैदल चलके गांधी जी के विचार सुने बर पहुंचिन। गांधी जी के बात सुनके ओकर मन म आंदोलन के ज्वाला अउ भड़क गीस।

    गांव लौट के भेलवापानी म बैठक रखे गीस, जेमां अंग्रेजी शासन के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाए के संकल्प लेय गीस। जब देश भर म कांग्रेस द्वारा नागपुर म झण्डा सत्याग्रह के आह्वान होइस, त सुखदेव पातर अऊ ओकर साथी नागपुर पहुंचिन। उहाँ ले चरखा अंकित तिरंगा झंडा लान के वो मन अपन संघर्ष के प्रतीक बना लिन।

    भेलवापानी के खंडी नदी किनारे एक आम बगीचा म ऊंच आम पेड़ ऊपर तिरंगा फहराय गीस। करीब 200-300 स्वराजी मन एकजुट होके बैठक करिन अऊ तय करिन के अंग्रेजी हुकूमत ला कोनो चंदा, मदद या लगान नई दे जाही। ओही बगीचा “पातर बगीचा” के नाम ले पहचाने जाए लागिस अऊ आज घलो वो आम पेड़ “झण्डा आमा” के नाम ले जाने जाथे। ये घटना गांव के इतिहास म आजादी के प्रतीक बन गीस।

    समय बीतिस, फेर संघर्ष थमिस नई। 5 अप्रैल 1942 ला भानुप्रतापपुर बाजार म मजिस्ट्रेट बहादुर साहब के बंगला सामने झण्डा जुलूस निकाल के सुखदेव पातर, कंगलू कुम्हार अऊ दारसू गोंड मन अहिंसात्मक विरोध दर्ज करिन। अंग्रेजी शासन ये ला चुनौती समझिस अऊ 7 अप्रैल 1942 ला दरबार आदेश जारी करके जुलूस अऊ बैठक ऊपर प्रतिबंध लगा दीस।

    प्रतिबंध के बावजूद भेलवापानी म एक गुप्त बैठक रखे गीस, फेर एक मुखबिर के सूचना ले पुलिस पहुंच गीस अऊ सुखदेव पातर, कंगलू कुम्हार अऊ रंजन हलबा ला गिरफ्तार कर लिहिस। भारत रक्षा कानून के धारा 38 के तहत मुकदमा चलिस अऊ सुखदेव पातर अऊ कंगलू कुम्हार ला 25-25 रुपिया जुर्माना या चार महीना के कठोर कारावास के सजा सुनाय गीस।

    भेलवापानी के ये संघर्ष सिरिफ एक गांव के कहानी नई आय। ये छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचल म जागे स्वाभिमान अऊ आजादी के चेतना के प्रतीक आय। झण्डा सत्याग्रह ये साबित कर दिस के छोटे गांव अऊ साधारण लोग घलो इतिहास के धारा मोड़ सकत हें, जेन मन अहिंसा अऊ साहस के रास्ता अपनाय रहिन।

    (श्रेय – आदिशौर्य : छत्तीसगढ़ की जनजातीय गौरव गाथा)

    लेखिका परिचय : श्रीमती संपदा दुबे ने छत्तीसगढ़ी विषय में स्नातकोत्तर (एम.ए.) किया है और वे बिलासपुर, छत्तीसगढ़ की निवासी हैं। वे छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य की गंभीर अध्येता तथा समर्पित लेखिका हैं। क्षेत्रीय भाषा के संरक्षण, संवर्धन और उसे संवैधानिक पहचान दिलाने से जुड़े विषयों पर उनका विशेष ध्यान रहता है।

    छत्तीसगढ़ी के इतिहास, व्याकरण, लोकसाहित्य तथा संविधान की 8वीं अनुसूची में इसके समावेश जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर वे शोधपरक और जागरूकतापूर्ण लेखन करती हैं। Email Id: vlograghav1@gmail.com

    Law Notify Team

    Team Law Notify

    Law Notify is an independent legal information platform working in the field of law science since 2018. It focuses on reporting court news, landmark judgments, and developments in laws, rules, and government notifications.
    1 mins