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जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी दोषी करार, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दिया 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

बिलासपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने अमित जोगी की 2007 में हुई दोषमुक्ति (Acquittal) को रद्द करते हुए उन्हें 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का कड़ा निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला 23 साल पुराना है। 4 जून 2003 को एनसीपी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त राज्य में अजीत जोगी की कांग्रेस सरकार थी। साल 2007 में सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में 28 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन मुख्य आरोपी माने जा रहे अमित जोगी को “संदेह का लाभ” देते हुए बरी कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से पलटा फैसला

सीबीआई और मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने इस बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह मेरिट (गुण-दोष) के आधार पर इस मामले की दोबारा सुनवाई करे। कोर्ट ने माना कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते हुई यह हत्या एक गंभीर साजिश थी।

प्रतिक्रियाएं: ‘न्याय की जीत’ बनाम ‘अन्याय’

  • अमित जोगी: फैसले के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया (X) पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “हाई कोर्ट ने मुझे बिना सुने महज 40 मिनट में दोषी ठहरा दिया। एक व्यक्ति जो पहले बरी हो चुका था, उसे बिना सुनवाई के मौका दिए सजा सुनाना अभूतपूर्व है। मुझे सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है।”
  • सतीश जग्गी (मृतक के पुत्र): सतीश जग्गी ने भावुक होते हुए कहा, “आज सत्य की जीत हुई है। मेरे परिवार का 20 साल का वनवास खत्म हुआ। हनुमान जयंती के दिन न्याय मिला है, इसके लिए मैं न्यायपालिका और सीबीआई का आभारी हूँ।”

अमित जोगी के पास अब सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प है, लेकिन फिलहाल उन्हें 21 दिनों के भीतर जेल प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण करना होगा।