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April 7, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कार सर्विस सेंटर की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए पीड़ित उपभोक्ता को अधिक मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला एक कार में आग लगने और पूरी तरह नष्ट हो जाने से जुड़ा था, जो सर्विस के लिए दी गई थी।
आयोग के समक्ष यह मामला अपील के रूप में आया, जिसमें एक ओर उपभोक्ता ने मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की थी, जबकि दूसरी ओर सर्विस सेंटर संचालकों ने खुद को जिम्मेदारी से मुक्त करने की कोशिश की। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि वाहन उस समय सर्विस सेंटर की देखरेख में था, इसलिए उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हीं की थी।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता आई. सुधाकर राव ने अक्टूबर 2019 में एक नई हुंडई i10 कार खरीदी थी। कुछ ही समय बाद दिसंबर 2019 में उन्होंने कार को मरम्मत के लिए सर्विस सेंटर भेजा। इसी दौरान सर्विस सेंटर में आग लग गई और कार पूरी तरह जलकर नष्ट हो गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यह घटना सर्विस सेंटर की लापरवाही के कारण हुई और उन्हें पूरी क्षतिपूर्ति मिलनी चाहिए।
जिला आयोग ने पहले अपने आदेश में सर्विस सेंटर को लगभग 7.13 लाख रुपये (एक्स-शोरूम कीमत) देने का निर्देश दिया था। साथ ही वाहन किराये, मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के लिए अतिरिक्त रकम भी निर्धारित की गई थी।
हालांकि, राज्य आयोग ने इस फैसले की समीक्षा करते हुए पाया कि जिला आयोग ने वाहन की पूरी लागत को ध्यान में नहीं रखा। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता ने वाहन खरीदने के लिए कुल 8.23 लाख रुपये खर्च किए थे, जिसमें बीमा, आरटीओ शुल्क और अन्य खर्च भी शामिल थे। चूंकि वाहन खरीद के केवल दो महीने के भीतर पूरी तरह नष्ट हो गया, इसलिए वास्तविक भुगतान की गई पूरी राशि को मुआवजे के रूप में देना न्यायसंगत है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी इस मामले में जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि आग लगने के बाद कोई वैध दावा लंबित नहीं था और वाहन सर्विस सेंटर की निगरानी में था। ऐसे में सर्विस सेंटर संचालकों की संयुक्त जिम्मेदारी बनती है।
अंततः आयोग ने शिकायतकर्ता की अपील आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मुआवजा बढ़ाकर 8,23,014 रुपये कर दिया। वहीं, सर्विस सेंटर की अपील को खारिज कर दिया गया। आयोग ने पहले दिए गए अन्य निर्देशों को यथावत रखा।
यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें साफ किया गया है कि यदि कोई वाहन सर्विस सेंटर की निगरानी में नुकसान होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सर्विस प्रदाता पर ही होगी।
Case Reference : I. Sudhakar Rao Vs. Branch Manager, Shivnath Hyundai & Ors.