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April 8, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने बैंकिंग सेवा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए उपभोक्ताओं की अपील खारिज कर दी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब ऋण अनुबंध में ब्याज दरों को लेकर दोनों पक्षों की सहमति दर्ज हो और दस्तावेजों में इसका उल्लेख हो, तो बाद में इसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता।
यह मामला देवकी वर्मा एवं अन्य बनाम कोटक महिंद्रा बैंक से जुड़ा है, जिसमें अपीलकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बैंक ने ट्रैक्टर और हार्वेस्टर के लिए लिए गए ऋण पर तय 10.43% की बजाय लगभग 19.17% तक अधिक ब्याज वसूला। उनका कहना था कि यह अत्यधिक और अनुचित है, खासकर तब जब ऋण पर सब्सिडी भी जुड़ी हुई थी।
हालांकि, बैंक की ओर से प्रस्तुत पक्ष में कहा गया कि ऋण समझौते के समय ही 19.17% और 17.7% की ब्याज दर तय की गई थी, जिसकी जानकारी उपभोक्ताओं को दी गई थी और उन्होंने उस पर हस्ताक्षर कर सहमति भी दी थी। आयोग ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों, विशेषकर ऋण एग्रीमेंट और रिपेमेंट शेड्यूल का अवलोकन करते हुए पाया कि ब्याज दरें पूर्व निर्धारित थीं और इन्हें लेकर कोई भ्रामक प्रस्तुति नहीं की गई थी।
फैसले में यह भी सामने आया कि जिस 10.43% ब्याज दर का हवाला दिया गया, वह एक प्रारंभिक या परिवर्तनीय दर थी और वास्तविक ब्याज दर ऋण वितरण के समय लागू शर्तों के अनुसार तय होती है। (पेज 7 पर उल्लेखित दस्तावेज के अनुसार) इससे यह स्पष्ट हुआ कि ब्याज दर स्थिर नहीं थी और अनुबंध के तहत परिवर्तनशील थी।
आयोग ने यह भी पाया कि अपीलकर्ताओं द्वारा कृषि यंत्र सेवा केंद्र स्थापित करने के लिए दी गई सब्सिडी का पूरा उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुसार नहीं किया गया था। दस्तावेजों (पेज 6) से स्पष्ट हुआ कि केवल ट्रैक्टर और हार्वेस्टर की खरीद की गई, जबकि अन्य कृषि उपकरणों के खरीद संबंधी कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। ऐसे में आयोग ने माना कि सब्सिडी राशि पर दावा करने का अधिकार भी पूर्ण रूप से स्थापित नहीं हुआ।
इन सभी तथ्यों के आधार पर आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि बैंक की ओर से सेवा में कोई कमी नहीं थी और जिला आयोग द्वारा पहले पारित आदेश उचित था। इसलिए अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया।
Case Reference : Devki Verma Vs. Kotak Mahindra Bank