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Consumer Protection

राज्य आयोग ने ट्रैक्टर आग मामले में उपभोक्ता को राहत, आयोग ने बीमा कंपनी को ₹6.19 लाख भुगतान का आदेश दिया।

April 23, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी द्वारा खारिज किए गए दावे को गलत ठहराते हुए उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय दिया है। आयोग ने कहा कि केवल तकनीकी आधारों पर दावा अस्वीकार करना उचित नहीं है, खासकर जब दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से उपभोक्ता के पक्ष में हों।

यह मामला मुंगेली जिले के निवासी पद्दू साहू से जुड़ा है, जिन्होंने एक सोलिस ट्रैक्टर खरीदा था और उसका बीमा कराया था। बीमा पॉलिसी 29 नवंबर 2023 से 28 नवंबर 2024 तक प्रभावी थी। 19 दिसंबर 2023 को सुबह करीब 10:30 बजे, ट्रैक्टर थ्रेसर के साथ उपयोग के दौरान आग की चपेट में आ गया और पूरी तरह नष्ट हो गया।

घटना के बाद साहू ने बीमा कंपनी के पास दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ था। बीमा कंपनी के अनुसार, रजिस्ट्रेशन उसी दिन बाद में हुआ था, इसलिए यह पॉलिसी शर्तों का उल्लंघन था।

जिला उपभोक्ता आयोग ने भी इसी आधार पर शिकायत खारिज कर दी थी। हालांकि, राज्य आयोग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र में ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन दिनांक 19 दिसंबर 2023 दर्ज है, जो दुर्घटना के दिन ही है। केवल प्रिंट टाइम को आधार बनाकर यह मान लेना कि रजिस्ट्रेशन दुर्घटना के बाद हुआ, एक अनुमान मात्र है और इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है।

आयोग ने यह भी कहा कि न्यायिक और अर्ध-न्यायिक संस्थाओं को केवल ठोस तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए, न कि अनुमान या बाहरी बातों पर। इस मामले में बीमा कंपनी का दावा खारिज करने का आधार कमजोर और अवैध पाया गया।

फैसले में आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह ट्रैक्टर की बीमित घोषित मूल्य (IDV) ₹6,22,250 में से 0.5% कटौती के बाद ₹6,19,139 का भुगतान करे। इसके साथ ही 6% वार्षिक ब्याज 30 अप्रैल 2024 से देने का आदेश दिया गया है। मानसिक पीड़ा के लिए ₹50,000 और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹7,000 भी देने को कहा गया है। यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो राशि पर 9% वार्षिक ब्याज लागू होगा।

यह फैसला उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि बीमा कंपनियां केवल तकनीकी या अनुमान आधारित कारणों से दावों को खारिज नहीं कर सकतीं।

Case Reference : Paddu Sahu Vs. Manager, SBI General Insurance Co. Ltd. & Anr.