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April 7, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने एक महत्वपूर्ण बीमा विवाद मामले में आंशिक राहत देते हुए जिला आयोग का आदेश रद्द कर दिया और मामले को दोबारा सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। यह मामला नाबालिग मोक्षित साहू की ओर से दायर अपील से जुड़ा है, जिसमें एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी द्वारा बीमा दावा न देने को चुनौती दी गई थी।
मामले के अनुसार, मोक्षित साहू की मां गमिता साहू ने वर्ष 2017 में एसबीआई लाइफ की “स्मार्ट वेल्थ बिल्डर” पॉलिसी ली थी, जिसमें हर साल प्रीमियम जमा किया जाता था और परिपक्वता पर लाभ मिलने का प्रावधान था। पॉलिसी के तहत कुल 2.49 लाख रुपये जमा किए गए थे और बीमा राशि लगभग 10 लाख रुपये तय थी। मई 2021 में गमिता साहू की मृत्यु हो गई, जिसके बाद परिवार ने बीमा दावा प्रस्तुत किया।
बीमा कंपनी ने दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बीमाधारक ने प्रस्ताव फॉर्म में अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में सही जानकारी नहीं दी थी और पूर्व बीमारी को छिपाया था। इसी आधार पर कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों का हवाला देते हुए भुगतान से इनकार कर दिया।
दूसरी ओर, अपीलकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि बीमाधारक को कोई गंभीर बीमारी नहीं थी और कंपनी ने बिना पर्याप्त साक्ष्य के दावा खारिज किया। साथ ही यह भी कहा गया कि मृत्यु का वास्तविक कारण निमोनिया था, न कि कोई पूर्व बीमारी।
मामले में एक और जटिल पहलू यह रहा कि पॉलिसी में नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) बीमाधारक की मां थीं, जबकि दावा नाबालिग पुत्र की ओर से पिता द्वारा प्रस्तुत किया गया था। इस बीच पारिवारिक विवाद और आपराधिक आरोपों के कारण भी स्थिति उलझी रही।
राज्य आयोग ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि बीमा कंपनी के पास विधिवत दावा प्रस्तुत किए जाने और आवश्यक दस्तावेज मिलने का स्पष्ट प्रमाण नहीं है। साथ ही, यह भी सामने आया कि नामांकित व्यक्ति की ओर से कंपनी के समक्ष पूर्ण दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल नहीं किया गया था।
इसी आधार पर आयोग ने माना कि जिला आयोग ने बिना पूरी प्रक्रिया पूरी कराए ही शिकायत खारिज कर दी, जो उचित नहीं था। आयोग ने आदेश दिया कि अपीलकर्ता नामांकित व्यक्ति के माध्यम से एक महीने के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ बीमा दावा कंपनी के समक्ष प्रस्तुत करे। इसके बाद कंपनी एक महीने के भीतर दावा तय करेगी और परिणाम से असंतोष होने पर जिला आयोग मामले की फिर से सुनवाई करेगा।
इस तरह राज्य आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा विवादों में प्रक्रिया का पालन और दस्तावेजों की पूर्णता बेहद महत्वपूर्ण है, और बिना इन पहलुओं की जांच किए शिकायत खारिज नहीं की जा सकती।
Case Reference : Mokshit Sahu Vs. B.M., S.B.I. Life Insurance Co. Ltd. & Anr.