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छत्तीसगढ़ उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: खराब बीज मामले में कंपनी की अपील खारिज, किसानों को मुआवजा बरकरार

April 8, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए बीज कंपनी नोबेल सीड्स प्राइवेट लिमिटेड की तीनों अपीलों को खारिज कर दिया है। आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग कबीरधाम के फैसले को सही ठहराते हुए किसानों को दिया गया मुआवजा बरकरार रखा। यह आदेश 8 अप्रैल 2026 को पारित किया गया।

मामले की सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौर्डिया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने स्पष्ट कहा कि कंपनी किसानों को हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार है। आयोग ने पाया कि बीज की गुणवत्ता खराब थी और किसानों को गलत जानकारी देकर बीज बेचे गए।

यह विवाद वर्ष 2024 का है, जब कबीरधाम जिले के किसान परशोत्तम निर्मलकर सहित अन्य किसानों ने फूलगोभी की खेती के लिए ‘नोबेल हैप्पी 101’ किस्म के बीज खरीदे थे। किसानों को बताया गया था कि यह बीज उच्च गुणवत्ता का है और गर्मी में भी अच्छी पैदावार देगा। लेकिन फसल तैयार होने पर 50 से 60 प्रतिशत तक फूल नहीं आए और जो फूल आए वे भी खराब गुणवत्ता के थे, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ।

जिला प्रशासन की ओर से गठित जांच टीम ने मौके पर निरीक्षण कर रिपोर्ट दी कि फसल खराब होने का कारण मौसम नहीं बल्कि बीज की गुणवत्ता है। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि बीज गर्मी के लिए उपयुक्त होने के बावजूद उत्पादन प्रभावित हुआ, जिससे बीज की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हुए।

बीज कंपनी ने अपील में तर्क दिया कि फसल खराब होने का कारण मौसम, अत्यधिक वर्षा और तकनीकी कारण थे, साथ ही यह भी कहा कि अन्य किसानों को ऐसी समस्या नहीं हुई। हालांकि आयोग ने पाया कि कंपनी इन दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। केवल अखबार की कतरनों को प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया गया।

आयोग ने यह भी माना कि किसान से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह बीज का नमूना सुरक्षित रखे ताकि बाद में परीक्षण कराया जा सके। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय आयोग के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा गया कि विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट पर्याप्त साक्ष्य है।

जिला आयोग ने पहले ही किसानों को प्रति एकड़ एक लाख रुपये के हिसाब से मुआवजा देने का आदेश दिया था, जिसमें फसल नुकसान, खेती का खर्च और बीज की कीमत शामिल थी। इसके साथ मानसिक पीड़ा के लिए अतिरिक्त राशि और वाद व्यय भी दिया गया था। राज्य आयोग ने इस मुआवजे को उचित ठहराते हुए उसमें कोई बदलाव नहीं किया।

आयोग ने साफ कहा कि बीज कंपनी जांच रिपोर्ट को खारिज करने के लिए कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सकी, इसलिए अपील में कोई दम नहीं है। परिणामस्वरूप, तीनों अपीलों को निरस्त कर दिया गया और जिला आयोग का आदेश बरकरार रखा गया।

Case Reference : Nobel Seeds Pvt. Ltd. Vs. Purushottam Nirmalkar & Anr.