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बिलासपुर – जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने खाताधारक के हस्ताक्षर के बिना एजेंट को 5.50 लाख रुपये का भुगतान किए जाने के मामले में डाक विभाग सहित अन्य पक्षों को दोषी ठहराया है। आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाने और निकाली गई राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
आवेदक 72 वर्षीय भवानी सिन्हा, निवासी हजारीबाग (झारखंड), कुछ समय के लिए अपने पुत्र राहुल सिन्हा के साथ गुलाब नगर, मोपका, सरकण्डा में रह रही थीं। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय बचत पत्र से संबंधित कार्य के लिए डाकघर के अल्प बचत एजेंट संजय नारंग (निवासी 27 खोली) को आवश्यक फॉर्म भरकर दिए। आरोप है कि एजेंट ने 17 मई से 13 जून 2019 के बीच 22 बार बिना उनके हस्ताक्षर के आहरण फॉर्म भरते हुए कुल 5.50 लाख रुपये निकाल लिए।
शिकायत के बावजूद राशि वापस नहीं मिलने पर भवानी सिन्हा ने उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज कराया। सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पाण्डेय ने इसे स्पष्ट रूप से सेवा में कमी माना। आयोग ने डाकघर मुख्य कार्यालय, एसईसीएल शाखा और एजेंट संजय नारंग को आदेश दिया कि वे आदेश की प्राप्ति से 45 दिनों के भीतर 5.50 लाख रुपये आवेदक को लौटाएं। साथ ही वर्ष 2020 से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 5 हजार रुपये वाद व्यय भी अदा करने होंगे।
आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि हस्ताक्षर का मिलान नहीं होने के बावजूद कोर बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से एजेंट को भुगतान किया जाना गंभीर लापरवाही है और इसे सेवा में कमी माना जाएगा।
करोड़ों की ठगी में फरार है एजेंट
जानकारी के अनुसार, विकास नगर 27 खोली निवासी संजय नारंग और उसकी पत्नी अनिता नारंग ने राजेन्द्रनगर मुख्य डाकघर के पास ‘अक्षय कंसल्टेंसी’ के नाम से कार्यालय खोला था। दोनों पर लोगों को विभिन्न योजनाओं में अधिक लाभ दिलाने का लालच देकर धन जमा कराने और बाद में फर्जी तरीके से खाताधारकों के करोड़ों रुपये निकालकर फरार होने के आरोप हैं। वर्ष 2019 में सिविल लाइन थाना में दंपति के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था, लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी है।