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April 13, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में निर्माण विवाद से जुड़े मामले में ठेकेदार की अपील खारिज कर दी है और जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा है।
13 अप्रैल 2026 को दिए गए इस निर्णय में आयोग ने एस. साई कुमार द्वारा दायर अपील को निरस्त करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग दुर्ग के आदेश की पुष्टि की। जिला आयोग ने पहले ही शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए ठेकेदार को निर्देश दिया था कि वह शिकायतकर्ता को अतिरिक्त निर्माण खर्च के रूप में 2.45 लाख रुपये अदा करे। इसके अलावा 20,000 रुपये मानसिक पीड़ा के लिए और 5,000 रुपये वाद व्यय के रूप में देने के आदेश दिए गए थे।
मामला भिलाई में एक मकान निर्माण अनुबंध से जुड़ा था। शिकायतकर्ता और ठेकेदार के बीच एक लिखित समझौता हुआ था, जिसके तहत पुराने कच्चे मकान को तोड़कर एक मंजिला पक्का मकान बनाना था। इस कार्य के लिए कुल 9 लाख रुपये तय किए गए थे और निर्माण कार्य 1 फरवरी 2019 तक पूरा होना था। शिकायतकर्ता ने अलग-अलग किश्तों में 5.48 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया था।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि ठेकेदार ने काम शुरू करने के बाद उसे अधूरा छोड़ दिया और आगे निर्माण करने से इनकार कर दिया। अधूरा निर्माण भी निम्न स्तर का था, जिसके कारण उसे तोड़कर दोबारा काम करवाना पड़ा। इसके लिए शिकायतकर्ता को दूसरे ठेकेदार की मदद लेनी पड़ी और अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा।
वहीं, ठेकेदार ने अपने बचाव में दावा किया कि उसने अनुबंध के अनुसार काम पूरा कर दिया था और शिकायतकर्ता जानबूझकर शेष भुगतान से बचने के लिए झूठे आरोप लगा रहा है। उसने यह भी कहा कि अतिरिक्त खर्च के दावों के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
राज्य आयोग ने रिकॉर्ड और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद पाया कि ठेकेदार अपने दावों को साबित करने में असफल रहा, जबकि शिकायतकर्ता ने बिलों और दूसरे ठेकेदार के शपथपत्र सहित पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत किए। आयोग ने माना कि ठेकेदार ने अनुबंध के अनुसार कार्य पूरा नहीं किया और अधूरा तथा दोषपूर्ण निर्माण छोड़ दिया, जो सेवा में कमी (deficiency in service) की श्रेणी में आता है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी आधारों पर प्रस्तुत दस्तावेजों को खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं हो।
इन सभी तथ्यों को देखते हुए आयोग ने कहा कि जिला आयोग का आदेश उचित और कानूनी रूप से सही है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। परिणामस्वरूप, ठेकेदार की अपील को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया और पहले दिया गया मुआवजा आदेश बरकरार रखा गया।
Case Reference : S. Sai Kumar Vs. M.D. Reddy