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April 13, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने एक अहम फैसले में बीमा दावा खारिज करने के जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि यदि मृत्यु जानबूझकर की गई लापरवाही या कानून के उल्लंघन के कारण होती है, तो ऐसी स्थिति में बीमा पॉलिसी के तहत दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला स्मृति आशा वाडबुड़े द्वारा दायर अपील से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने अपने पति आनंद कुमार की मौत के बाद ₹10 लाख के बीमा दावे का भुगतान न होने पर शिकायत की थी। उनके पति एक समूह दुर्घटना बीमा पॉलिसी के तहत कवर थे। 11 अगस्त 2018 को उनके पति की मौत बिजली के करंट लगने से हुई थी। परिवार ने बीमा कंपनी के पास दावा प्रस्तुत किया, लेकिन लंबे समय तक कोई निर्णय नहीं लिया गया और अंततः दावा अस्वीकार कर दिया गया।
बीमा कंपनी का कहना था कि मृतक ने बिना अनुमति अपने घर की छत पर बिजली की सर्विस लाइन से छेड़छाड़ की, जो बिजली अधिनियम का उल्लंघन है। इस तरह की कार्रवाई को बीमा पॉलिसी की शर्तों के तहत “एक्सक्लूजन क्लॉज” में रखा गया है, जिसके कारण दावा मान्य नहीं माना गया।
जिला उपभोक्ता आयोग, दुर्ग ने भी इस आधार पर शिकायत खारिज कर दी थी कि यह कोई आकस्मिक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि जानबूझकर की गई लापरवाही का परिणाम थी। इसके खिलाफ अपील राज्य आयोग में दायर की गई।
राज्य आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में स्पष्ट था कि मृतक स्वयं सर्विस लाइन को संभाल रहे थे, जिससे उन्हें करंट लगा और उनकी मृत्यु हो गई। आयोग ने कहा कि यह कृत्य न केवल गैरकानूनी था, बल्कि जोखिमपूर्ण भी था, और इसे आकस्मिक दुर्घटना नहीं माना जा सकता।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही मृतक के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज न हुआ हो, लेकिन बिजली अधिनियम के प्रावधानों के तहत इस प्रकार की कार्रवाई स्वयं में अपराध की श्रेणी में आती है। इसलिए इसे बीमा पॉलिसी के अपवाद (exclusion clause) के अंतर्गत रखा जाएगा।
अंततः आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार करना उचित था और जिला आयोग के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। इस आधार पर अपील को खारिज कर दिया गया और कोई लागत नहीं लगाई गई।
Case Reference : Smt. Asha Wadbude Vs. B.M., BSP Employees Co-operative & Welfare Society Ltd. & Anr.