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छत्तीसगढ़ आयोग ने बीमित हित न होने पर कार बीमा दावा खारिज किया, अपील भी निरस्त।

April 23, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा दावा खारिज किए जाने के खिलाफ दायर अपील को निरस्त कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि दुर्घटना के समय वाहन पर अपीलकर्ता का “बीमित हित” (insurable interest) स्थापित नहीं था, इसलिए बीमा कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार करना सही था।

मामला साहेब लाल जाटवार बनाम The New India Assurance Company Limited से जुड़ा है। अपीलकर्ता ने अपनी कार के लिए प्राइवेट कार पैकेज पॉलिसी ली थी, जो 25 मई 2022 से 24 मई 2023 तक प्रभावी थी। 11 जून 2022 को रात में वाहन दुर्घटनाग्रस्त होकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद करीब 8.41 लाख रुपये का बीमा दावा पेश किया गया, जिसे कंपनी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दुर्घटना के समय अपीलकर्ता का वाहन में बीमित हित नहीं था।

जिला आयोग, बिलासपुर ने भी पहले इस शिकायत को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ यह अपील दायर की गई थी। अपील में तर्क दिया गया कि वाहन के रजिस्ट्रेशन (आरसी) में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और बीमा कंपनी ने तथ्यों को नजरअंदाज किया। हालांकि, आयोग ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि दस्तावेजों में विरोधाभास है और यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वाहन का स्वामित्व कब और कैसे स्थानांतरित हुआ।

आयोग ने यह भी कहा कि यदि वाहन का स्वामित्व बदला गया था, तो बीमा पॉलिसी में नाम परिवर्तन करवाना अपीलकर्ता की जिम्मेदारी थी। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 157(2) के तहत केवल थर्ड पार्टी जोखिम स्वतः ट्रांसफर होता है, जबकि वाहन के नुकसान से संबंधित जोखिम के लिए बीमा कंपनी और नए मालिक के बीच अलग से अनुबंध आवश्यक होता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले Complete Insulations (P) Ltd. बनाम New India Assurance Co. Ltd. का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि बिना वैध अनुबंध के बीमा लाभ नहीं दिया जा सकता।

इन सभी तथ्यों के आधार पर आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि दुर्घटना के समय अपीलकर्ता का बीमित हित सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए बीमा कंपनी की ओर से दावा खारिज करना सेवा में कमी नहीं माना जा सकता। परिणामस्वरूप, अपील को निरस्त करते हुए जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा गया।

Case Referene : Saheb Lal Jatwar Vs. The New India Ins. Co. Ltd.