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बीमा दावा विवाद में राज्य आयोग ने कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया, जिला आयोग का आदेश रद्द।

April 17, 2026 : छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, रायपुर ने बीमा दावे से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी की अपील स्वीकार कर ली है और जिला आयोग के आदेश को रद्द कर दिया है। यह मामला कैनरा एचएसबीसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और स्म्ति अलका नाग के बीच बीमा दावे को लेकर था।

दरअसल, स्म्ति अलका नाग के पति ने मकान निर्माण के लिए 20 लाख रुपये का ऋण लिया था, जिसके साथ एक ग्रुप बीमा पॉलिसी भी ली गई थी। पॉलिसी के तहत एकमुश्त प्रीमियम का भुगतान किया गया था। बीमा प्रभावी रहने के दौरान दिसंबर 2022 में उनके पति की मृत्यु हो गई, जिसके बाद परिजनों ने बीमा दावा पेश किया। हालांकि, बीमा कंपनी ने दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बीमाधारक ने पॉलिसी लेते समय अपनी पूर्व स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई थी।

जिला उपभोक्ता आयोग, महासमुंद ने पहले इस मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में आंशिक राहत देते हुए बीमा कंपनी को भुगतान करने का निर्देश दिया था। लेकिन इस आदेश को बीमा कंपनी ने राज्य आयोग में चुनौती दी।

राज्य आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड, दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट का विस्तृत परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि बीमाधारक पहले से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं जैसे अल्कोहल विदड्रॉल सिंड्रोम और अन्य बीमारियों से पीड़ित था, जिनकी जानकारी प्रस्ताव फॉर्म में नहीं दी गई थी। जांच रिपोर्ट और चिकित्सा दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ कि पॉलिसी लेने से पहले ही संबंधित बीमारी का इलाज चल रहा था।

आयोग ने यह भी माना कि बीमा अनुबंध “अत्यधिक सद्भावना के सिद्धांत” (Principle of Uberrimae Fides) पर आधारित होता है, जिसके तहत बीमाधारक पर सभी महत्वपूर्ण तथ्यों का सही खुलासा करना आवश्यक होता है। इस मामले में तथ्यों को छिपाना अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन माना गया।

इसी आधार पर राज्य आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज करना उचित था और इसमें सेवा में कोई कमी नहीं पाई गई। परिणामस्वरूप, आयोग ने बीमा कंपनी की अपील स्वीकार करते हुए जिला आयोग का आदेश निरस्त कर दिया।

इस फैसले के साथ यह स्पष्ट संदेश भी गया है कि बीमा पॉलिसी लेते समय तथ्यों को छिपाना उपभोक्ताओं के लिए गंभीर कानूनी परिणाम ला सकता है और ऐसे मामलों में कंपनियों का निर्णय न्यायालयों में टिक सकता है।

Case Reference : Canara HSBC Life Insurance Co. Ltd. Vs. Smt. Alka Nag & Ors.